Home » उत्तर प्रदेश » Baba Ramdev Patanjali cancels Rs 6,000-crore mega food processing park proposal in Uttar Pradesh
 

योगी सरकार से रूठे रामदेव, UP से शिफ्ट होगा पतंजलि फूड पार्क

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 June 2018, 11:18 IST

बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद यूपी के यमुना एक्सप्रेसवे में अपने फूड पार्क परियोजना को राज्य सरकार की मंजूरी न मिलने के कारण छोड़ रही है. हालांकि इस पर राज्य सरकार ने कहा है कि पतंजलि के पास अभी अंतिम मंजूरी के लिए 1 महीने का और समय दिया जाएगा.

वहीं, कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी का कहना है कि यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (वाईईआईडीए) को राज्य सरकार से जमीन के ट्रांसफर के लिए आवश्यक मंजूरी नहीं मिल सकी है.

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बता दें कि बाबा रामदेव की हरिद्वार स्थित पतंजलि कंपनी फूड एंड हर्बल पार्क के माध्यम से घरेलू और निर्यात बाजारों की जरुरतों को पूरा करने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे के पास 425 एकड़ जमीन पर में एक फूड पार्क बनाने के लिए 6,000 करोड़ रुपये का निवेश करने का प्रस्ताव रखा था.

इस पर पतंजलि आयुर्वेद के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण ने कहा, “हम इस परियोजना को रद्द कर रहे हैं क्योंकि हमें यूपी सरकार से आवश्यक मंजूरी नहीं मिली है.” इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी अब परियोजना को किसी अन्य राज्य में ट्रांसफर करने का प्लान कर रही है.

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वही यूपी में फूड पार्क स्थापित न करने के कारण को लेकर उन्होंने कहा, " हमें इस परियोजना के लिए राज्य सरकार से कोई सहयोग नहीं मिला. हमने मंजूरी के लिए लंबे समय तक इंतजार किया है लेकिन राज्य सरकार से नहीं मिल सकी. अब हमने परियोजना को सिफ्ट करने का फैसला किया है." खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा पतंजलि को इस परियोजना को शुरू करने हेतु जरूरी मंजूरी लेने के लिए जून अंत तक का समय दिया गया था.

 

वहीं इस पर खाद्य प्रसंस्करण सचिव जेपी मीणा ने बताया, " अंतिम अनुमोदन प्राप्त करने के लिए आवश्यक शर्तों को पूरा करने के लिए पतंजलि को चार महीने का समय दिया गया था. जमीन और बैंक ऋण सहित चार से पांच शर्ते हैं , जो मेगा फूड पार्क स्थापित करने वाले किसी भी कंपनी को पूरा करना होगा."

खाद्य सचिव मीणा ने आगे कहा, " हमने इस परियोजना को रद्द नहीं किया है. हमने पतंजलि को एक महीने का समय दिया है. उन्हें इस शर्त को पूरा करना होगा. अगर पतंजलि इस शर्त को पूरा नहीं करते हैं, तो हमारे पास रद्द करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. हमने पहले भी ऐसा कई परियोजनाओं के मामले में किया है.

First published: 6 June 2018, 10:07 IST
 
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