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UP: दलित दूल्हे को हाईकोर्ट ने भी नहीं दी घोड़ी चढ़कर बारात निकालने की परमीशन

सुहेल खान | Updated on: 3 April 2018, 14:26 IST

उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के एक गांव में दलित दूल्हे को घोड़ी चढ़ने की इजाजत नहीं मिल रही. पहले जिला प्रशासन और अब हाईकोर्ट ने भी उसके घोड़ी चढ़ने की मंजूरी नहीं दी. इलाहाबाद हाई कोर्ट का कहना है कि वह दलित को घोड़ी पर चढ़कर बारात निकालने की इजाजत नहीं दे सकता. हालांकि न्यायालय ने ये भी कहा कि याची को किसी प्रकार की परेशानी है तो वह मुकदमा दर्ज करा सकता है.

क्या है पूरा मामला

कासगंज के निजामपुर गांव की शीतल की शादी हाथरस जिला के बसई के गांव के संजय के साथ तय हुई है. इनकी शादी 20 अप्रैल को होनी है. शीतल का परिवार चाहता है कि दूल्हा संजय घोड़ी चढ़कर निजामपुर आए. लेकिन मुश्किल ये है कि इस गांव में पिछले करीब 100 साल में किसी दलित की बारात घोड़ी चढ़कर नहीं निकली.

जब संजय को इस बात का पता चला तो उसने जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक अपनी अर्जी दी. लेकिन सभी ने गांव की शांति व्यवस्था भंग होने का हवाला देकर संजय को निजामपुर गांव में घोड़ी चढ़कर बारात निकालने की इजाजत नहीं दी.

दूल्हा संजय की दिली ख्वाहिश है कि वह निजामपुर में घोड़ी चढ़कर बारात निकाले और सदियों से चली आ रही इस परंपरा को तोड़े. इसीलिए संजय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में शरण ली और घोड़ी चढ़कर बारात निकालने की कोर्ट से मांग की. लेकिन हाई कोर्ट से भी संजय को निराशा ही हाथ लगी.

हाई कोर्ट ने नहींं दी घोड़ी चढ़कर बारात निकालने की इजाजत

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि वह याचिका में इस प्रकार की अनुमति याची को नहीं दे सकता. न्यायमूर्ति रणविजय सिंह और न्यायमूर्ति शशिकांत की डिवीजन बेंच ने दूल्हे संजय कुमार की अर्जी को निस्तारित करते हुए यह आदेश दिया.

बता दें कि जिला प्रशासन ने दूल्हे की मांग के खिलाफ न्यायालय को जानकारी उपलब्ध कराई थी कि ऐसा करने से वहां का स्थानीय माहौल बिगड़ सकता है. स्थानीय प्रशासन की रिपोर्ट पर न्यायालय ने याची को राहत नहीं दी. न्यायालय ने कहा कि याचिका पर अलग से कोई आदेश जारी करने का औचित्य नहीं है. अगर दूल्हे या लड़की पक्ष के लोगों से कोई जोर-जबरदस्ती करे तो वह पुलिस में इसकी शिकायत कर सकते हैं.

 

पुलिस और जिला प्रशासन पहले ही कर चुका है इंकार

बता दें कि पुलिस और जिला प्रशासन पहले ही दलित दूल्हे संजय को निजामपुर में घोड़ी चढ़कर बारात निकालने से मना कर चुका है. पुलिस और जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का हवाला देकर दलित को घोड़ी चढ़ बारात निकालने से इंकार कर दिया था. इसी के खिलाफ दलित दूल्हा संजय ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी.

आसपास के गांव में भी नहीं चढ़ने दी जाती थी छोटी जाति वालों की बारात

बताया जाता है कि आसपास के गांव भी ठाकुर बाहुल्य गांव है. जिनमें कांतौर, खुर्रमपुर, सलेमपुर और मोहनपुरा, टीकमपुरा गांव शामिल हैं. इन सभी गांवों में ज्यादातर ठाकुल विरादरी के लोग रहते हैं. बताया जाता है कि निजामपुर गांव के पास स्थित रामपुर गांव में पहले लोधी जाति के लोग साहू या तेली (पिछड़ी जाति) लोगों की बारात घोड़ी चढ़कर नहीं निकलने देते थे. लेकिन कुछ साल पहले एक शिक्षक की कोशिश रंग लाई. उसके बाद इस रामपुर में साहू विरादरी की बारात घोड़ी चढ़कर निकलने लगी.

 

वकालत की पढ़ाई कर रहा है दलित दूल्हा संजय

निजामपुर गांव में बारात ले जाने को तैयार दूल्हा संजय अलीगढ़ के किसी कॉलेज से वकालत की पढ़ाई कर रहा है. यही वजह है संजय अपने अधिकारों के लिए शासन-प्रशासन से लड़ रहा है. लेकिन शायद संजय की किस्मत में नहीं लिखा कि वो सदियों से चली आ रही इस खोखली प्रथा को तोड़कर निजामपुर गांव में घोड़ी चढ़कर बारात निकाले. संजय का कहना है कि पढ़-लिखने के बाद भी आप अपने अधिकार नहीं समझ पाए, जो उन्हें संविधान ने दिये है तो किसी का भी पढ़ना लिखना व्यर्थ है.

वकालत की पढ़ाई कर रहा है दलित दूल्हा संजय

निजामपुर गांव में बारात ले जाने को तैयार दूल्हा संजय अलीगढ़ के किसी कॉलेज से वकालत की पढ़ाई कर रहा है. यही वजह है संजय अपने अधिकारों के लिए शासन-प्रशासन से लड़ रहा है. लेकिन शायद संजय की किस्मत में नहीं लिखा कि वो सदियों से चली आ रही इस खोखली प्रथा को तोड़कर निजामपुर गांव में घोड़ी चढ़कर बारात निकाले. संजय का कहना है कि पढ़-लिखने के बाद भी आप अपने अधिकार नहीं समझ पाए, जो उन्हें संविधान ने दिये है तो किसी का भी पढ़ना लिखना व्यर्थ है.

First published: 3 April 2018, 13:16 IST
 
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