Home » उत्तर प्रदेश » Deoria Shelter Home Case: CM has ordered for the removal of Deoria's DM Sujit Kumar
 

देवरिया शेल्टर हाउस मामला: सीएम योगी ने दिए देवरिया के डीएम को हटाने के आदेश

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 August 2018, 15:21 IST

यूपी के देवरिया में शेल्टर होम से 24 बच्चियों और लड़कियों को छुड़ाए जाने के मामले में यूपी महिला एवं बाल कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देवरिया के डीएम सुजीत कुमार को हटाने का आदेश दे दिया है.

साथ ही इस पर रिपोर्ट आने के बाद उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी. इस शेल्टर हाउस से अभी भी 18 लडकियां गायब हैं. उन्होंने कहा मुख्यमंत्री ने जांच के लिए देवरिया दो सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति भेजी गई है.

इस मामले में पुलिस ने बालिका गृह की संचालिका गिरिजा त्रिपाठी, उनके पति मोहन तिवारी और बेटी को गिरफ्तार किया है. देवरिया के मां विंध्यवासिनी बालिका गृह में चल रहे देह व्यापार का खुलासा वहीं रहने वाली एक लड़की ने किया है. 10 साल की मासूम ने जो कुछ भी पुलिस को बताया, वो होश उड़ा देने वाला था. रविवार शाम को यह मासूम किसी तरह महिला थाने पहुंची और शेल्टर होम में चल रही करतूत का खुलासा किया.

बच्ची ने पुलिस को बताया कि रोज शाम चार बजे बड़ी-बड़ी गाड़ियों में लोग आते थे और 15 साल के ऊपर की लड़कियों को ले जाते थे. मासूम ने बताया कि सुबह जब लड़कियां आती थीं तो वे कुछ नहीं बोलती थीं. बस वे रो रही होती थीं. बच्ची ने बताया कि इसके अलावा उन्हें दूसरे के घरों में झाड़ू-पोछा जैसे तमाम घरेलू कामों के लिए भी भेजा जाता था.

बता दें कि मां विंध्यवासिनी बालिका गृह पिछले कई सालों से शहर के रेलवे स्टेशन रोड से चल रहा था. इसकी एक शाखा शहर के रजला गांव में भी थी. इस संस्था की मान्यता एक साल पहले 2017 में स्थगित हो चुकी थी. उस समय सीबीआई ने इसकी जांच की थी. हालांकि संरक्षक गिरजा त्रिपाठी ने अपने ऊंची रसूख का फायदा उठाकर मान्यता रद्द होने के बाद भी लड़कियां रखती थी. कोई अधिकारी इन पर हाथ डालने से कतराता था.

ये भी पढ़ें : यूपी: देवरिया में भी मुजफ्फरपुर शेल्टर होम जैसा मामला, लग्जरी गाड़ियों में लोग आते और लड़कियों को ले जाते

बता दें कि मां विंध्यवासिनी बालिका गृह पिछले कई सालों से शहर के रेलवे स्टेशन रोड से चल रहा था. इसकी एक शाखा शहर के रजला गांव में भी थी. इस संस्था की मान्यता एक साल पहले 2017 में स्थगित हो चुकी थी. उस समय सीबीआई ने इसकी जांच की थी. हालांकि संरक्षक गिरजा त्रिपाठी ने अपने ऊंची रसूख का फायदा उठाकर मान्यता रद्द होने के बाद भी लड़कियां रखती थी. कोई अधिकारी इन पर हाथ डालने से कतराता था.

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First published: 6 August 2018, 14:59 IST
 
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