Home » उत्तर प्रदेश » Etawah: Man carries body of his son on shoulders after a govt hospital allegedly denies to provide ambulance
 

मजदूर दिवस के दिन मजबूर मजदूर ने कंधे पर ढोया बेटे का शव

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 May 2017, 12:34 IST

ऐसा लगता है कि ओडिशा के कालाहांडी की घटना से हमारे हुक्मरानों और प्रशासनिक अधिकारियों ने कोई सबक नहीं लिया है. यूपी के इटावा में एक मज़दूर पिता के साथ वही हुआ जो ओडिशा में दाना मांझी के साथ हुआ था. सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि ये घटना मज़दूर दिवस के दिन घटी. 

एक मई को इटावा के सरकारी अस्पताल में उदयवीर सिंह को अपने बेटे की लाश कंधे पर ढोकर घर तक ले जानी पड़ी. क्योंकि अस्पताल ने उसे एंबुलेंस देने से इनकार कर दिया था और उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वो गाड़ी बुक कराकर अपने बेटे की लाश घर तक ले जा पाता.

 

 

इलाज के लिए परेशान उदयवीर  अपने 15 साल के बेटे को दो बार गांव से 7 किमी दूर सरकारी अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने न तो उन्हें एंबुलेंस की सुविधा ऑफर की और न ही उसका इलाज किया. पेशे से मजदूर उदयवीर ने कहा कि डॉक्टरों ने उनके बेटे पुष्पेंद्र का इलाज करने से ये कह कर मना कर दिया कि अब उसके शरीर में कुछ नहीं बचा है.

उदयवीर के अनुसार उसके बेटे के दर्द था. इसके बाद उदयवीर बेटे के बेजान शरीर को कंधे पर लादकर अस्पताल से बाहर निकल गया. इस बीच किसी ने मोबाइल फोन से उदयवीर का वीडियो बना लिया. बता दें कि इटावा का सरकारी अस्पताल यूपी के बेहतरीन अस्पतालों में से एक माना जाता है. 

इस बारे में जब इटावा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर राजीव यादव से बात की गई तो उनका कहना था, "दरअसल, उसी समय सड़क हादसे में घायल कई लोग अस्पताल में आ गए और शायद यही वजह हो कि मृत बच्चे को शव वाहन न मिल सका हो, लेकिन ये बेहद शर्मनाक है."

पिछले साल अगस्त में ओडिशा से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई थी. जहां दाना मांझी को अपनी पत्नी के शव को कंधे पर लादकर जाना पड़ा था, क्योंकि अस्पताल में एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध नहीं थी. मांझी के साथ उनकी बेटी भी पैदल चल रही थी और उसके चेहरे पर दुख और बेबसी के आंसू थे.

First published: 3 May 2017, 12:34 IST
 
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