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लखनऊ के 'नवाब' पर चढ़ा 'भगवा' रंग

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 July 2017, 16:22 IST
यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के साथ बुक्कल नवाब

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने लखनऊ में अपने प्रवास के दौरान चुनावी हार से उबरने की कोशिश कर रही सपा-बसपा को झटका दिया है. पार्टी से इस्तीफ़ा देने के बाद तीन विधान परिषद सदस्यों ने भाजपा का दामन थाम लिया है.

तीनों एमएलसी बुक्कल नवाब, यशवंत सिंह और जयवीर सिंह सोमवार को भाजपा में शामिल हो गए. बुक्कल नवाब और यशवंत सिंह समाजवादी पार्टी से, जबकि जयवीर सिंह बसपा के एमएलसी थे. बुक्कल नवाब ने इस्तीफ़े के बाद पीएम मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ की तारीफ़ करते हुए भाजपा में शामिल होने की तरफ इशारा किया था.

बुक्कल नवाब जुलाई 2016 में दूसरी बार विधान परिषद के लिए चुने गए थे. तीनों नेताओं ने अमित शाह की मौजूदगी में लखनऊ स्थित पार्टी दफ्तर में औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ली. बुक्कल नवाब मुलायम सिंह यादव के करीबी माने जाते हैं. वह लखनऊ शहर में प्रभावी शिया समाज से आने वाले मुस्लिम नेता हैं. इसके साथ ही उनका लखनऊ के नवाब परिवार से संबंध है. 1992 में सपा ज्वाइन करने वाले बुक्कल पार्टी के प्रदेश महासचिव भी रहे हैं.

1989 में बुक्कल नवाब ने लखनऊ नगर निगम के दौलतगंज वार्ड से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीता था. उस वक्त राज्य में ये जीत का सबसे बड़ा अंतर था. लखनऊ पश्चिम विधानसभा सीट से बुक्कल दो बार सपा से चुनाव लड़ चुके हैं. हालांकि दोनों बार उन्हें करीबी मुकाबले में शिकस्त झेलनी पड़ी थी.

 

बुक्कल नवाब ने जनवरी 2016 में राम मंदिर का समर्थन करते हुए कहा था, "मैं मुस्लिम हूं और मैं भगवान राम का बहुत सम्मान करता हूं. मैं चाहता हूं कि अयोध्या में राम मंदिर बने. इसके लिए मैं 10 लाख रुपये का दान भी दूंगा और सोने का मुकुट भी चढ़ाऊंगा."

भाजपा में शामिल हुए जयवीर सिंह को बसपा सुप्रीमो मायावती का खास माना जाता है. 2007 में माया की सरकार में वे कैबिनेट मंत्री भी रहे थे. इसके अलावा यशवंत सिंह को निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया का करीबी माना जाता है.

माना जा रहा है कि इस्तीफे के बाद खाली हुई सीटों पर योगी सरकार के कुछ मंत्री चुनाव लड़ सकते हैं. पार्टी अब विधान परिषद के रास्ते सदन भेजने की जुगत में है. दरअसल योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव मौर्य और दिनेश शर्मा के अलावा मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह और मोहसिन रजा अभी किसी सदन के सदस्य नहीं हैं.

सितंबर तक मुख्यमंत्री समेत पांच मंत्रियों को किसी सदन का सदस्य बनना ज़रूरी है. विधानसभा चुनाव में मिले प्रचंड बहुमत के बाद योगी आदित्यनाथ ने 19 मार्च को यूपी की सत्ता संभाली थी. 403 सदस्यों की विधानसभा में भाजपा ने अकेले 312 सीटें जीती थीं. वहीं उसके सहयोगी अपना दल (एस) को 9, जबकि सुहेददेव भारतीय समाज पार्टी को 4 सीटों पर जीत हासिल हुई थी.

First published: 31 July 2017, 16:22 IST
 
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