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हाशिमपुरा हत्याकांड: डायरी से हुआ बड़ा खुलासा- 40 मुसलमानों की हत्या में शामिल थे PAC कर्मी

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 March 2018, 12:30 IST

आज से ठीक 30 बरस पहले 22 मई 1987 की रात यूपी की रिज़र्व पुलिस बल प्रोविंशियल आर्म्ड कांस्टेबुलरी (PAC) पर आरोप लगा था कि उन्होंने 42 मुसलमानों को हिरासत में लेकर गोली मार दी थी. आरोप था कि पीएसी के जवानों ने हत्या के बाद उनकी लाशें ग़ाज़ियाबाद की गंग नहर और हिंडन नदी में फेंक दी थी.

मारे गए मुसलमान मुहल्ला हाशिमपुरा, ज़िला मेरठ के रहने वाले थे. सभी दिहाड़ी मज़दूर और पेशे से बढ़ई, दर्ज़ी, जुलाहे थे. हाशिमपुरा कांड अलविदा (रमज़ान महीने का आख़िरी जुमा) के दिन हुआ था. जुमे की नमाज़ के बाद बुज़ुर्गों, बच्चों और औरतों को छोड़कर कमोबेश सभी को उठा लिया गया था. सभी को सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन में हाज़िर करने के बाद जेल भेजा जा रहा था.

मगर रिज़र्व पुलिस बल पीएसी के जवान आख़िरी ट्रक ग़ाज़ियाबाद की ओर ले गए थे. इस ट्रक में ज़्यादातर कम उम्र के नौजवान बिठाए गए थे जिन्हें जवानों ने गंग नहर के पास गोली मार दी थी.

अब लगभग 40 साल बाद यूपी सरकार ने एक डायरी पेश की है जिसमें आरोपी पीएसी कर्मियों के नाम दर्ज हैं. यह डायरी 78 वर्षीय गवाह रणबीर सिंह बिश्नोई की ओर से तैयार की गई है.

रणबीर सिंह बिश्नोई कल (27 मार्च) को तीस हजारी कोर्ट के सेशन कोर्ट में हाजिर हुए और केस डायरी सौंपा. केस डायरी में मेरठ पुलिस लाइंस में 1987 में तैनात पीएसी कर्मियों के नाम दर्ज हैं.

 

बिश्नोई ने कोर्ट में कुल 17 पीएसी कर्मियों के नाम बताए. इसमें प्लाटून कमांडर सुरेंद्र पाल सिंह, हेड कांस्टेबल निरंजन लाल, कमल सिंह, श्रवण कुमार, कुश कुमार, एससी शर्मा, कांस्टेबल ओम प्रकाश, जय पाल, महेश प्रसाद, राम ध्यान, लीलाधर, हमबीर सिंह, कुंवर पाल, बुद्ध सिंह, शमी उल्लाह, बसंत, बल्लभ, नाइक रामबीर सिंह का नाम शामिल है.

गौरतलब है कि रणबीर सिंह बिश्नोई ने ही हाशिमपुरा हत्याकांड की चार्जशीट तैयार की थी. उन्होंने कोर्ट में कहा कि मैने सभी दस्तावेजों की जांच कर ही चार्जशीट दायर की थी. घटना के दिन 22 मई 1987 की जीडी की प्रति से पुलिस लाइंस में तैनात पीएसी कर्मियों के नाम का पता चला.

बता दें कि अदालत ने साल 2015 में इन आरोपी पीएसी कर्मियों को सुनवाई के दौरान बरी कर दिया था. मार्च 2015 में सेशन कोर्ट ने आरोपी 16 पीएसी कर्मियों को सुबूत के अभाव में बरी कर दिया था. तब कोर्ट ने कहा था कि यह तो साबित होता है कि हाशिमपुरा मुहल्ले के 40 से 45 लोगों का पीएसी के ट्रक से अपहरण किया गया और उन्हें मारकर गंग नहर, मुराद नगर और हिंडन नदी में फेंक दिया गया था. मगर यह साबित नहीं हुआ कि मारने वालों में पीएसी कर्मी ही थे.

First published: 28 March 2018, 12:23 IST
 
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