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गुजरात जगुआर प्लेन हादसा: पायलट ने खुद का बलिदान देकर बचाई सैकड़ों बेगुनाहों की जान

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 June 2018, 13:42 IST
(File Photo)

भारतीय वायुसेना का जगुआर लड़ाकू विमान मंगलवार को गुजरात के जामनगर वायुसैनिक अड्डे से उड़ान भरने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस विमान हादसे ने यूपी के लाल संजय चौहान की सांसें छीन लीं. संजय देश की सेवा करते हुए शहीद हो गए. संजय चौहान भारतीय वायुसेना में एयर कोमोडोर के पद पर तैनात थे. जगुआर लड़ाकू विमान को संजय ही उड़ा रहे थे. वो नियमित प्रशिक्षण मिशन पर थे. लेकिन सुबह करीब साढ़े दस बजे उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया.

पायलट एयर कमांडर संजय चौहान आखिरी सांस तक लड़ाकू विमान जगुआर को खाली जमीन पर उतारने की कोशिश करते रहे. वो चाहते थे कि विमान आबादी वाले इलाके में ना गिरे. जिसमें हजारों लोगों की जान जा सकती थी. एयर कमांडर संजय चौहान ने लोगों की जान तो बचा ली लेकिन खुद इस दुनिया को छोड़कर हमेशा-हमेशा के लिए चले गए.

एयर कमांडर संजय चौहान के पास खुद को बचाने के कई विकल्प थे. लेकिन उन्होंने अपनी जान की परवाह ना कर उन सैकड़ों बेगुनाहों की परवाह की जो जमीन पर गिरते फाइटर प्लेन जगुआर को देख रहे थे. संजय अगर चाहते तो प्लेन से इजेक्ट हो सकते थे और अपनी जान बचा सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. उन्हें समझ आ गया था कि जगुआर में खराबी आ गई है और उनका फाइटर प्लेन क्रैश होने वाला है.

लोगों की जान बचाने के लिए उन्होंने जगुआर को खाली जमीन पर लैंड कराने की कोशिश की. इसी कोशिश में उनकी जान चली गई. लेकिन सैकड़ों लोगों के शरीर को खरोंच तक नहीं आने दी.

बता दें कि एयर कमांडर संजय चौहान को फाइटर प्लेन उड़ाने का अच्छा अनुभव था. वे 3800 घंटे की उड़ान भर चुके थे. उन्होंने भारतीय वायुसेना के 17 विमान उड़ाए थे. उन्होंने कई विदेशी विमानों की भी टेस्टिंग की थी. उन्होंने राफेल भी उड़ाया था.

एयर कमांडर संजय चौहान की पारिवारिक पृष्ठिभूमि भी सेना की रही है. उनके पिता एनएस चौहान सेना में अधिकारी थे. संजय ने 1986 में वायुसेना ज्वाइन की थी. 1989 में वे कमीशंड हुए. वे फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी थे. साल 2010 में उन्हें वायुसेना मेडल भी मिला था.

चार दिन पहले ही परिवार से मिलने आए थे संजय

फाइटर प्लेन जगुआर हादसे में शहीद हुए एयर कमांडर संजय चौहान चार दिन पहले ही परिवार से मिलने लखनऊ आए थे. जाते वक्त उन्होंने अपनी मां से वादा किया था वो जल्द ही वापस आएंगे. संजय वापस तो आए लेकिन इस बार उन्होंने किसी से बात नहीं की. वो एक दम खामोश थे. उनके शरीर पर लिपटा तिरंगा इस बात की गवाही दे रहा था कि उन्होंने देश की सेवा में खुद का बलिदान दे दिया. संजय की मौत से परिवार में मातम पसरा हुआ है. सैकड़ों संबंधियों का उनके घर पर जमघट लगा हुआ है. एयर कमांडर संजय चौहान के इस बलिदान को देश हमेशा याद रखेगा.

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First published: 6 June 2018, 13:42 IST
 
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