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‘बाल नरेंद्र’ के बाद अब ‘रहम दिल मुलायम’

अतुल चंद्रा | Updated on: 2 December 2016, 7:29 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के बचपन पर पार्टी ने एक चित्रकथा जारी की है. 
  • इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी बचपन पर \'बाल नरेंद्र\' नाम से चर्चित चित्रकथा बाज़ार में आ चुकी है.  

जब नरेंद्र मोदी के बचपन पर कॉमिक्स छप सकती है, तो समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव पर क्यों नहीं? आम चुनाव 2014 से ठीक पहले बचपन के नरेंद्र मोदी पर ‘बाल नरेंद्र’ नाम से कॉमिक्स आई थी. इस चर्चित सीरीज का प्रकाशन फ्रेश ऑफ द प्रेस ने किया था. 

अब शायद 'बाल नरेंद्र' की देखा-देखी समाजवादी पार्टी ने भी मुलायम सिंह यादव पर कॉमिक्स छपवा दी है. कॉमिक्स का नाम काफी लंबा है, 'एक ग़रीब परवर, रहमदिल की कहानी.' इटावा ज़िले के सैफई गांव के एक पहलवान से राजनेता बने मुलायम पर छपी 30 पन्नों की इस कॉमिक्स में चित्र हाथ से बनाए गए हैं. कॉमिक्स को शिवपाल यादव ने मुलायम के जन्मदिन के दो दिन बाद 24 नवंबर को जारी किया.

इस कॉमिक्स में ना सिर्फ़ सैफ़ई गांव में बीते सपा अध्यक्ष के बचपन के दिनों का ब्यौरा है, बल्कि अयोध्या आंदोलन के दौरान उत्तर-प्रदेश में मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी भूमिका का भी ज़िक्र है. सपा की महिला शाखा की अध्यक्ष सोनिया शर्मा ने इस कॉमिक्स की एडिटिंग की है. कहा जा रहा है कि पार्टी मुखिया के सम्मान में इसे जारी किया गया है. 

मुलायम कथा

हालांकि इस कॉमिक्स में मुलायम के बचपन की कहानी किसी कथा की तरह कही गई है. जैसे एक जगह लिखा है, 'मुलायम के माता-पिता मूर्ति देवी और सुगढ़ सिंह की पुरानी झोपड़ी से गुज़रते हुए एक साधू ने भविष्यवाणी की थी कि यह बालक एक दिन खुद का और परिवार का नाम रोशन करेगा.'

मुलायम के राजनीतिक विरोधी भले ही उन्हें यादव जाति का पक्षधर मानकर उनकी आलोचना करें, मगर कॉमिक्स उनकी शख्सियत पर एक अलग ही रोशनी डालती है. 5वें पन्ने के कैप्शन में लिखा है कि युवावस्था में मुलायम जातिगत छुआछूत में विश्वास नहीं करते थे और एक बार उन्होंने जाटव जाति के साथ बुरा बर्ताव करने पर उच्च जाति के एक लडक़े को सबक सिखाया था.' 

दलित हितैषी

8वें पन्ने पर इसी बात पर और ज़ोर दिया गया है. इस पन्ने पर लिखा है कि मुलायम ‘सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए’ दलित युवाओं के साथ होली खेल कर जातिगत भेदभाव का विरोध करते थे. इस कॉमिक्स में वह स्वतंत्रता सेनानी, लोहियावादी, धरतीपुत्र के रूप में भी चित्रित हैं. कॉमिक्स में मुलायम को देश का प्रधानमंत्री बनाने का खुला मैसेज है, जिसमें शायद उनकी दलितों के पक्ष में छवि उभारी गई है. 

बहरहाल, चित्रकथा जारी करने के मौके पर ना तो मुलायम मौजूद थे और ना ही उनके बेटे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव. माना जा रहा है कि मुलायम के चरित्र चित्रण की सीरीज में यह दूसरी किताब है और सपा प्रमुख के जीवन का इसमें बहुत ही संक्षिप्त ब्यौरा है. शायद इसीलिए पार्टी के ज्यादातर सदस्यों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. 

First published: 2 December 2016, 7:29 IST
 
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