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EPF घोटाला: योगी सरकार आने के बाद डिफॉल्टर कंपनी DHFL में हुआ था 2,600 करोड़ निवेश !

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 November 2019, 10:22 IST

कर्मचारी भविष्य निधि घोटाला यानि EPF घोटाला यूपी की योगी सरकार के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है. नए दस्तावेज सामने आए हैं, इनसे पता चला है कि डिफॉल्टर कंपनी दीवान हाउसिंग फायनेंस लिमिटेड यानि DHFL में 2,600 करोड़ रुपये निवेश का निर्णय अखिलेश सरकार नहीं बल्कि योगी सरकार के सत्ता पर काबिज होने के बाद लिया गया था.

दरअसल, यूपी के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने पहले कहा था कि डीएचएफएल में ईपीएफ निवेश करने का निर्णय पूर्व की अखिलेश यादव सरकार के दौरान लिया गया था. उत्तर प्रदेश स्टेट पॉवर सेक्टर इम्प्लाईस ट्रस्ट की बैठक और एफआईआर का जिक्र करते हुए यूपी पॉवर इम्प्लाईस जॉइंट कमेटी ने बताया कि कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई को डीएचएफएल में निवेश करने का निर्णय योगी सरकार बनने के पांच दिनों बाद 24 मार्च, 2017 को लिया गया था.

न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए बिजली यूनियन के प्रमुख नेता शैलेंद्र दुबे ने कहा कि घोटाले की सीबीआई जांच कराने के सरकार के निर्णय का वह स्वागत करते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चाहिए कि वह सबसे पहले ऊर्जा मंत्रालय के उच्च अधिकारियों को हटाएं. इससे डीएचएफएल मुद्दे से संबंधित दस्तावेज और फाइलें सुरक्षित रह सकेंगी.

ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के अध्यक्ष दुबे ने कहा, "यह स्पष्ट हो चुका है कि डीएचएफएल में पैसा निवेश करने का निर्णय 24 मार्च, 2017 को योगी सरकार के दौरान लिया गया था. हमने बैठकों के मिनट देखे हैं. मौजूदा सरकार ने ट्रस्ट के दो अधिकारियों को ईपीएफ के पैसे निवेश करने के लिए अधिकृत किया. 2017-2018 के दौरान एक बड़ी राशि डीएचएफएल को भेजी गई, लिहाजा जरूरी है कि मौजूदा अधिकारियों को बिजली मंत्रालय में नहीं रहना चाहिए."

बता दें कि विवादास्पद कंपनी डीएचएफएल माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम के सहयोगी मृत इकबाल मिर्ची से संबंधित है. हाल ही में कंपनी के प्रमोटरों से ईडी ने पूछताछ की थी. मामले में अभी तक यूपी सरकार कहती आ रही थी कि यह निर्णय अखिलेश यादव सरकार के दौरान साल 2014 में लिया गया था. योगी सरकार ने दावा किया था कि इसमें निवेश की प्रक्रिया साल 2016 के दौरान चलती रही.

योगी सरकार ने मामले में एक प्राथमिकी दर्ज कराई. दो वरिष्ठ अधिकारी यूपी स्टेट पॉवर इंप्लाईस ट्रस्ट और यूपीपीसीएल के प्रोविंडेंट फंड ट्रस्ट के तत्कालीन सचिव प्रवीण गुप्ता और यूपीपीसीएल के पूर्व निदेशक फायनेंस सुधाशु द्विवेदी को गिरफ्तार भी किया गया.

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First published: 5 November 2019, 10:10 IST
 
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