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प्रोजेक्ट हिंदू राष्ट्र: यूपी में दो दर्जन मुसलमानों की 'घर वापसी' क्या सिर्फ शुरुआत है?

अतुल चंद्रा | Updated on: 28 April 2017, 9:29 IST

 

घर वापसी यानी पुनर्धमांतरण फिर से उत्तर प्रदेश में एक मुद्दा बन चुका है. फैज़ाबाद से सटे जिले आंबेडकर नगर के अलापुर में दो दर्जन से अधिक मुस्लिमों ने इस्लाम को छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया. दो-तीन मुस्लिम परिवारों से जुड़े लोगों के इस धर्मांतरण में स्थानीय राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेता केसी श्रीवास्तव का हाथ माना जा रहा है.

 

जब श्रीवास्तव से पूछा गया कि इस धर्मांतरण के लिए क्या इन मुस्लिमों को कुछ प्रलोभन दिया गया था, तो उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में 'धर्मांतरण' शब्द का इस्तेमाल उचित नहीं होगा. श्रीवास्तव ने कहा ये लोग अपने उस घर को वापस लौट रहे हैं जिसको ये करीब 25 साल पहले छोड़ गए थे. श्रीवास्ताव उल्टा आपसे से ही सवाल करते हैं, 'आप इसको किस तरह से देखेंगे?'

 

घर वापसी का यह प्रोग्राम आरएसएस और आर्य सामज ने किया था. घर वापसी के क्रम में सभी धर्मांतरितों से एक विशेष पूजा करवाई गई और दावे के मुताबिक इस धर्मातंरण के लिए किसी प्रकार का प्रलोभन नहीं दिया गया और न ही दबाव बनाया गया. और चूंकि धर्मांतरण की पूजा करने के लिए न तो आंबेडकर नगर के टंडा आर्य समाज में और न ही अकबरपुर में इसकी व्यवस्था थी, इसलिए 15-16 मुसलमानों का यह समूह फैजाबाद के जमुनिया बाग के आर्य समाज मंदिर लाया गया.

जमुनिया बाग आर्य समाज ने जो प्रेस रिलीज जारी की है, उसमें उन्होंने समूह को फैजाबाद लाने वाले आंबेडकर नगर के निवासी सुरेंद्र कुमार के हवाले से कहा है कि वे चाहते हैं यह समूह स्वयं ही भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का संकल्प ले. समूह में किसी ने पत्रकारों से बात नहीं की. श्री

 

वास्तव जो कि बुधवार को लखनऊ में थे, सभी प्रकार के सवालों को टालते रहे और साथ ही उन्होंने मीडिया पर आरोप लगाया कि वह पीत पत्रकारिता पर उतर आया है. उन्होंने समूह में किसी को फोन नंबर देने से भी इंकार किया. अब घर वापसी के ये आयोजक समूह के लिए पुलिस संरक्षण की मांग कर रहे हैं और साथ ही इनकी मांग है इन्हें किसी मंत्री से मिलाया जाए.

 

इस सब की राजनीति

 

धर्मांतरण की यह राजनीति, यानी घर वापसी, 2014 के आम चुनाव अभियान के दौरान सुर्खियों में बना रहा था और लव जिहाद के मुद्दे के साथ यह लगातार चर्चा में और प्रासंगिक बना रहा. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार विश्व हिंदू परिषद के प्रवीन तोगड़िया घर वापसी का यह कहते हुए समर्थन किया था कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट यह कह चुका है कि हिंदुत्व एक जीवन का तरीका इसलिए घर वापसी में कुछ भी असंवैधानिक नहीं है.

 

दिसंबर 2014 में आगरा के धर्म जागरण समिति कार्यक्रम में इस संगठन के पदाधिकारी ने कहा था अगर मुस्लिम और ईसाईयों को भारत में रहना है तो इन्हें हिंदुत्व में वापस धर्मांतरित होना होगा. धर्म जागरण समिति के राज्य प्रमुख राजेश्वा सिंह, जिन्होंने 2014 में इस घर वापसी अभियान को चलाया था, ने इस समय कहा था कि हमारा लक्ष्य है कि 2021 तक भारत को हिंदू राष्ट्र बनाया जाए जहां पर मुस्लिमों और ईसाइयों को रहने के लिए कोई जगह नहीं होगी.


सिंह ने आगे यह भी कहा था कि, इसलिए उनको या तो उनको हिंदुत्व में धर्मांतरित होना होगा अथवा देश को छोड़कर जाना होगा. यह टिप्पणी उस समय आई थी जब डीजेएस के एक कार्यकर्ता नंद किशोर वाल्मीकि को आगरा में 100 मुस्लिमों के जबरदस्ती धर्मांतरण में भूमिका को लेकर गिरफ्तार किया गया था.

2015 में विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय महासचिव अशोक तिवारी ने एटा में कहा था कि, घर वापसी कतई कोई बुरी चीज नहीं है. यह तब तक जारी रहेगी जब जक कि हम उन सभी को वापस न ले आएं जो कि अपना घर छोड़कर गए थे. वीएचपी, आरएसएस, डीजेएस और बजरंग दल पर इस दबाव के बावजूद कि वे समाज को सांप्रदायिक लाइन पर बांटने के लिए प्रयास कर रहे हैं, उन्हें समाजवादी पार्टी सरकार ने काबू में रखा हुआ था.


अब जबकि प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार 325 सीटों के प्रचंड बहुमत से गठित हुई है, यह संभावना बनी हुई कि अब हाशिये पर पड़े ये समूह नये जोश के साथ अपने अभियान को पुनर्जीवित करें. योगी आदित्यनाथ जो कि स्वयं ही मुख्यमंत्री बनने के पूर्व घर वापसी और लव जिहाद की वकालात करते रहे हैं, को अब अपना रुख स्पष्ट करना ही होगा.

 

First published: 28 April 2017, 9:29 IST
 
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