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मिलिए सहारनपुर के 'रावण' से

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 May 2017, 15:56 IST
सोशल मीडिया

सहारनपुर में पांच मई को हुआ दलित-ठाकुर समाज का संघर्ष खतरनाक रूप ले चुका है. इस घटना के बाद से सहारनपुर में चार बार हिंसा हो चुकी है और इसमें अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है. कई दर्जन लोग जख्मी हैं.

पिछले तीन हफ्ते में हुई हिंसक झड़पों के बाद भीम आर्मी के संस्थापक और पेशे से वकील चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण सुर्खियों में हैं. पांच मई को शब्बीरपुर गांव में दलितों के घर जलाए जाने के चार दिन बाद सहारनपुर में दलित समुदाय ने प्रदर्शन किया था. इसके बाद चंद्रशेखर पर कथित रूप से हिंसा भड़काने को लेकर पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज की है. 

बताया जा रहा है कि गिरफ़्तारी से बचने के लिए चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ रावण ने हुलिया बदल लिया है. इस मामले में ज़िला प्रशासन पर आरोप लगे कि जातीय संघर्ष को संभालने में लापरवाही बरती जा रही है.

एक भावना यह भी उभरी कि सीएम आदित्यनाथ खुद ठाकुर (राजपूत) समुदाय से आते हैं, लिहाजा उनसे जुड़े वर्ग पर सख्ती नहीं बरती गई. भीम आर्मी के संस्थापक और पेशे से वकील चंद्रशेखर आज़ाद का आरोप है कि पुलिस उन्हें फंसाने की कोशिश कर रही है.

कौन है चंद्रशेखर आजाद ?

चंद्रशेखर को सुर्खियां तब भी मिलीं, जब उन्होंने अपने गांव घडकौली के सामने 'द ग्रेट चमार' का बोर्ड लगाया. वो बताते हैं, "इलाके में वाहनों तक पर जाति के नाम लिखे होते हैं और उन्हें दूर से पहचाना जा सकता है. जैसे द ग्रेट राजपूत, राजपूताना. इसलिए हमने भी 'द ग्रेट चमार' का बोर्ड लगाया. इसे लेकर विवाद भी हुआ लेकिन आज भी इसकी मौजूदगी है."

चाहे लड़ने-भिड़ने की बात हो या बराबरी की, पिछले कुछ महीनों में 30 साल के चंद्रशेखर उर्फ रावण की दलित युवाओं के बीच लोकप्रियता बढ़ी है.

नाम में रावण क्यों?

देहरादून से लॉ की पढ़ाई करने वाले चंद्रशेखर खुद को 'रावण' कहलाना पसंद करते हैं. इसके पीछे वो तर्क देते हैं, "रावण अपनी बहन शूर्पणखा के अपमान के कारण सीता को उठा लाता है, लेकिन उनको भी सम्मान के साथ रखता है."

चंद्रशेखर कहते हैं, "रावण अपनी बहन के सम्मान के लिए लड़ा और अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया, तो वो ग़लत कैसे हो सकता है."

भीम आर्मी की शुरुआत

चंद्रशेखर के मुताबिक भीम आर्मी की स्थापना दलित समुदाय में शिक्षा के प्रसार को लेकर अक्टूबर 2015 में हुई थी, इसके बाद सितंबर 2016 में सहारनपुर के छुटमलपुर में स्थित एएचपी इंटर कॉलेज में दलित छात्रों की कथित पिटाई के विरोध में हुए प्रदर्शन से ये संगठन चर्चा में आया.

मीडिया से बातचीत में चंद्रशेखर दावा करते हैं कि भीम आर्मी के सदस्य दलित समुदाय के बच्चों के साथ हो रहे कथित भेदभाव का मुखर विरोध करते हैं और इसी के कारण इस संगठन की पहुंच दूर-दराज़ के गांवों तक हुई है.

First published: 25 May 2017, 15:56 IST
 
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