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फिर सुलगा सहारनपुर: माया के दौरे के बाद दलित-ठाकुर संघर्ष में एक की मौत

सादिक़ नक़वी | Updated on: 24 May 2017, 9:41 IST
आर्या शर्मा/ कैच न्यूज़

मंगलवार 23 मई को उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सहारनपुर में शब्बीरपुर के हिंसाग्रस्त इलाकों और उसके पास ही कुछ गांवों का दौरा किया और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की. इसी दरम्यान यहां दलित और ठाकुरों के बीच हिंसक झड़प की ताज़ा घटनाएं घटीं. स्थानीय लोगों ने बताया कि सुआखरा गांव के आशीष की गोलियां लगने से ज़ख़्मी होने के बाद मौत हो गई. संघर्ष में 12 अन्य घायल हो गए. इनमें से 2 से 3 की हालत नाजुक है. ये सभी दलित हैं.

व्हाट्स ऐप पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक बुजुर्ग शख़्स यह बता रहा है कि 6-7 लोगों ने कैसे उस पर छिपकर तलवारों से वार किया. स्थानीय लोगों का कहना है कि हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं.

 

पीटीआई फ़ाइल फोटो

चौथी घटना

पिछले एक महीने के दौरान जिले में हिंसा की यह चौथी घटना है. इससे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के यूपी में कानून-व्यवस्था नियंत्रण में होने के दावे खोखले साबित हो रहे हैें. ऐसी घटनाओं से दलितों में आक्रोश बढ़ेगा ही, जो कहते हैं कि राज्य सरकार पक्षपाती सरकार है.

चश्मदीदों के मुताबिक बसपा प्रमुख मायावती को सुनने के लिए शब्बीरपुर में सैकड़ों दलित इकठ्ठे हुए थे. उन्हें अपने हेलीकॉप्टर से सुबह सहारनपुर के लिए उड़ान भरनी थी, लेकिन प्रशासन ने उन्हें इसकी इजाज़त नहीं दी और मायावती ने सड़क के रास्ते निकलना उचित समझा.

एक प्रत्यक्षदर्शी का कहना है कि जिस वक्त भीड़ मायावती का इंतज़ार कर रही थी, भीम सेना के कुछ युवाओं ने बसपा विरोधी नारे लगाने शुरू कर दिए. जब बसपा के एक नेता ने उन्हें यह कहकर शांत करने की कोशिश की कि उनक समर्थन में मायावती यहां आ रही हैं, तो उन्होंने नारे लगाने बंद कर दिए लेकिन फिर ठाकुरों के घरों पर पथराव करना शुरू कर दिया.

दलितों की उग्र भीड़ ने गांव में ठाकुर घरों में कुछ कूड़ा करकट या घास फूस जलाया और उनके घरों पर पथराव किया. उसने बताया जैसे ही मायावती की सभा ख़त्म हुई, शब्बीरपुर के पास स्थित चंद्रपुरा गांव में ठाकुरों और दलितों के बीच संघर्ष छिड़ गया. एक चश्मदीद ने कैच संवाददाता को बताया, "इतना उत्पात मचा हुआ था कि मैं मुश्किल से ही वहां से बच कर निकल पाया."

कैच ने वहां स्थानीय लोगों से बातचीत की तो पता लगा कि कम से कम 5 लोग बुरी तरह से ज़ख़्मी हुए हैं. एसएसपी, सहारनपुर एससी दुबे से तुरंत सम्पर्क नहीं साधा जा सका. प्रभावित क्षेत्र में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भेज दिया गया है.

 

सादिक़ नक़वी/ कैच न्यूज़

शब्बीरपुर में फिर हिंसा

जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर शब्बीरपुर में यह हिंसा की दूसरी घटना है. इससे पहले पास ही के सिमलाना गांव में 5 मई को महाराणा प्रताप जयंती पर राजपूतों द्वारा निकाले गए जुलूस पर दलितों ने हमला बोल दिया था. गांव में अम्बेडकर की प्रतिमा लगाए जाने का कुछ ठाकुरों ने विरोध किया था, इसलिए दलितों ने भी महाराणा प्रताप जयंती मनाए जाने पर विरोध जता दिया.

पथराव के विरोध में राजपूतों ने शब्बीरपुर और महेशपुर में कई दलितों के घर जला दिए, इस दौरान हिंसा में 10 दलित घायल हो गए थे. राजपूत समुदाय के सुमित की गंभीर अवस्था में घायल होने की वजह से मौत हो गई. रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने आठ ठाकुर युवाओं और सात दलितों को गिरफ़्तार किया है.

 

भीम सेना का संस्थापक एडवोकेट चंद्रशेखर आजाद 'रावण'

भीम सेना

सहारनपुर दरअसल भीम सेना की जन्म स्थली है. अपने को अहिंसा के रास्ते पर चलने वाला बताने वाले ये युवा शब्बीरपुर घटना के बाद हिंसक वारदात में शामिल पाए गए. भीम सेना शहर के गांधी पार्क में विरोध प्रदर्शन आयोजित करना चाहती थी, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने इसकी इजाजत नहीं दी. इनमें से कुछ पर पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया.

बाद में इस सेना ने शहर के बाहरी इलाकों में जिला प्रशासन के कुछ अधिकारियों पर हमले किए. साथ ही कुछ वाहन भी फूंक डाले. पुलिस ने भीम सेना प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ सहित इसके कार्यकर्ताओं के खिलाफ 20 से ज्यादा मामले दर्ज किए हैं.

पिछले हफ्ते कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने कैच न्यूज को बताया था कि उनहोंने भीम सेना को शहर में विरोध प्रदर्शन की इजाज़त नहीं दी थी, क्योंकि इससे दंगे भड़क सकते थे. भीम सेना शांति भंग कर सकती थी. पुलिस ने यह भी संकेत दिए कि भीम सेना और उसके साथी जल्द ही गिरफ्तार किए जा सकते हैं.

हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी दबाव के चलते पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर पाई. विरोध प्रदर्शन में 10,000 से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया. चंद्रशेखर ने अपने भाषण में कहा था कि भाजपा नीत राज्य सरकार किस प्रकार दलित विरोधी है और अब दलित अत्याचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने लगे हैं.

 

बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने संबोधन में भीम सेना को तरजीह नहीं दी.

अलग विचारधारा

स्थानीय दलितों का मानना है कि भाजपा की जीत के बाद ठाकुर कुछ ज्यादा ही आक्रामक हो गए हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि भीम सेना बसपा की ही एक इकाई है और इसे बसपा प्रमुख मायावती का समर्थन हासिल है. स्थानीय भाजपा नेताओं का कहना है कि अपने दलित वोटरों को भाजपा के पक्ष में देख मायावती होश खो बैठी हैं. कुछ ठाकुर नेताओं ने कहा कि राज्य सरकार दलितों के खिलाफ कुछ नहीं कर रही है.

 

मायावती का संबोधन

सहारनपुर के लिए रवाना होने से पहले दिल्ली में पत्रकारों को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा कि उन्होंने अब तक हिंसाग्रस्त इलाके का दौरा इसलिए नहीं किया था, क्योंकि वे हालात सामान्य होने देना चाहती थीं. शब्बीरपुर में उन्होंने एक बार फिर योगी आदित्यनाथ सरकार पर वार करते हुए कहा कि योगी सरकार जातिवाद को बढ़ावा देने वाली सरकार है और उच्च जाति की पक्षधर है.

उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह समाज को एकजुट करने का काम करे न कि बांटने का. माया ने अपने संबोधन में भीम सेना को ज़्यादा महत्व न देते हुए स्थानीय दलितों से आह्वान किया कि वे बसपा के बैनर तले अपने कार्यक्रम आयोजित करें.

रविवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर भीम सेना के कार्यकर्ता बड़ी तादाद में जुटे थे.
First published: 24 May 2017, 9:41 IST
 
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