Home » उत्तर प्रदेश » Saying it out loud: Hindutva outfit tries to polarise UP on loudspeaker issue
 

उत्तर प्रदेश: लाउडस्पीकर के बहाने राज्य में ध्रुवीकरण की कोशिश

चारू कार्तिकेय | Updated on: 22 April 2017, 9:08 IST


सोनू निगम का सीधा-सरल सा लगने वाला ट्वीट शुरूआती विवाद के बाद अब हास्पास्पद होता जा रहा है. इस मुद्दे को जो बल मिल गया है उससे हिंदुत्व ब्रिगेड इतना उत्साहित है कि वह इसके चारों ओर एक पूरा आंदोलन ही खड़ा करने की तैयारी कर रही है. भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता विनय कटियार द्वारा शुरू किये गये संगठन हिंदुत्व जागरण मंच ने घोषणा की है कि वह उत्तर प्रदेश में मस्जिदों में प्रयुक्त होने वाले लाउडस्पीकरों के खिलाफ एक पूरा अभियान ही शुरू करेगी.


जानकारी के मुताबिक मंच ने राज्य के सरकारी अधिकारियों से कहा है कि वे प्रदेश की मस्जिदों में इस्तेमाल होने वाले लाउडस्पीकर्स को हटवाना सुनिश्चित करें. माना जा रहा है कि इस संबंध में जल्द ही मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन देने की भी तैयारी है.


हिंदुत्व जागरण मंच के एक प्रतिनिधि ने अपनी मांग को साफ करते हुए कहा है कि उनका संगठन “अज़ान के खिलाफ नहीं, बल्कि नियमित रूप से लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल किए जाने के विरुद्ध है”, क्योंकि इससे ध्वनि प्रदूषण होता है. ये प्रतिनिधि सिर्फ गुरुद्वारों में इस्तेमाल होने वाले लाउडस्पीकरों को ही कुछ रियायत देने के पक्ष में था क्योंकि सिख सिर्फ त्योहारों के दौरान ही लाउडस्पीकर्स का इस्तेमाल करते हैं.

लेकिन जागरण मंच का यह प्रतिनिधि हिंदू त्योहारों के दौरान मंदिरों के ऊपर तथा जगरातों, चौकी और अन्य कई मौकों पर इस्तेमाल होने वाले लाउडस्पीकर्स को शातिराना तरीक़े से नज़रअंदाज कर देता है. हिंदुओं के कई ऐसे कार्यक्रम हैं जिनमें मंत्रों, भजनों के लिए लाउडस्पीकर्स पर सस्वर तेज़ पाठन कई दिन और रात लगातार चलता है. इसमें इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जाता है कि पड़ोस में रहने वाला कोई व्यक्ति इस आवाज से परेशानी महसूस कर सकता है. जब इन कार्यक्रम में लाउडस्पीकर चलना शुरू होता है तो ऐसे मौकों पर कई छात्रों को परेशान-सा देखना एक सामान्य अनुभव की बात हो चुकी है.

 

क्या यह तर्कसंगत है?


यह तो तय है कि हिंदुत्व जागरण मंच ऐसे कार्यक्रमों के ख़िलाफ़ कोई लाठी लेकर पीछे नहीं आने वाला है, क्योंकि वह एक हिंदुत्ववादी संगठन है. लेकिन फिर कौन इनके खिलाफ आवाज़ उठाएगा? निश्चित रूप से राज्य. और यही सारे-विवाद का विषय है. लाउड स्पीकर का दुरुपयोग एक कानून-व्यवस्था की समस्या है. धार्मिक कार्यक्रमों के अलावा शादियों और दूसरे कार्यक्रमों पर तेज़ संगीत की समस्या होती है.


जिस तरह से पुलिस किसी भी शादी आदि कार्यक्रम पर रेड कर सकती है, उनके उपकरण ज़ब्त कर सकती है अगर उनमें 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर्स वगैरह का इस्तेमाल किया जाता है. उसी तरह से मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारों और घरों आदि पर रेड की जा सकती है अगर उनमें तेज भजन आदि का लाउडस्पीकर पर पाठ किया जाता है. कानून इन सब पर कार्रवाई करने के लिए अधिकृत करता है, पर हिंदू जागरण मंच जैसे निगरानी संगठन को कौन यह ताकत देता है कि वे ऐसे मौकों पर कार्रवाई करें.

 

स्पष्ट हैं नियम


धार्मिक या सामाजिक, किसी भी प्रकार के कार्यक्रमों में किसी भी उद्देश्य के लिए लाउडस्पीकर के प्रयोग और नियमन के संबंध में साफ नियम बने हुए हैं और वे अपने स्वरूप में पूरी तरह से कानूनी हैं. राज्य और उसकी एजेंसियां जैसे पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इन कानूनों को लागू करने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश या किसी भी और अन्य राज्य में दी गई है.
http://www.uppcb.com/guide_loud.htm

ऐसे मुद्दों पर कई लोग कोर्ट में भी गए हैं और कोर्ट ने सही हस्तक्षेप करते हुए राज्य को इन संबंध में नियमन और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. इसलिए इस संबंध में किसी भी प्रकार के संगठन को निर्देश देने और इस उद्देश्य को हासिल करने के लिए आंदोलन करने की कहीं कोई जरूरत नहीं है.

इस मुद्दे को हवा सिर्फ राजनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए ही दी गई है जिससे भावनात्मक आधार पर एक उत्तेजना पैदा की जा सके. इसमें जागरण मंच आंदोलन करेगा और कुछ दूसरे संगठन या व्यक्ति इसका विरोध करेंगे और इस क्रम में केसरिया ब्रिगेड के असामाजिक तत्वों को मौका मिल जाएगा कि वे चीख-चीख कर यह बताएं कि धर्मनिरपेक्षतावादियों की पोल खुल चुकी है. उनके चेहरे से नकाब उतर चुका है.

ख़ैर, निगम को भी यह महसूस करना होगा कि उन्होंने ऐसे तत्वों को दोहन करने के लिए एक मुद्दा दे दिया है. एक व्यक्ति के 140 शब्दों के किसी बयान के कारण पिछले चार दिनों से पूरे देश में घबराहट और परेशानी है. यह इस बात का प्रमाण है कि सार्वजनिक जीवन जीने वाले लोग अपने वक्तव्यों और कार्यकलापों के बारे में सजग रहें. यह वह कीमत है जो उन्हें प्रसिद्धी के कारण चुकानी होती है.

First published: 22 April 2017, 9:08 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

पिछली कहानी
अगली कहानी