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सपा को बचाने के लिए शिवपाल ने अखिलेश के सामने रखी ये शर्त

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 April 2017, 14:07 IST
(फाइल फोटो)

शिवपाल यादव ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को नसीहत देते हुए पार्टी को बचाने के लिए एक शर्त रखी है. अखिलेश के चाचा और जसवंतनगर से सपा विधायक शिवपाल यादव ने मैनपुरी में सोमवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान अखिलेश को पार्टी का विवाद ख़त्म करने की नसीहत दी. 

शिवपाल यादव ने इस दौरान कहा, "अखिलेश पूरा घर एक करें, पूरी पार्टी एक करें. जो कहा पूरा करें. नैतिकता भी दिखाएं." दरअसल अखिलेश ने कहा था कि अगले तीन महीने के अंदर वो नेताजी यानी अपने पिता मुलायम सिंह यादव को समाजवादी पार्टी की कमान दोबारा सौंप देंगे. अखिलेश ने कहा था कि यूपी जीतकर वो नेताजी को सबसे बड़ा तोहफ़ा देंगे. हालांकि इसमें वे नाकाम रहे. 

शिवपाल ने अखिलेश को संबोधित बयान में कहा, "अखिलेश ने चुनाव से पहले जो कहा तीन महीने हो चुकेे हैं. नेताजी को सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दें. पूरा घर एक हो जाएगा." गौरतलब है कि शिवपाल और अखिलेश में लंबे अरसे से संबंध सामान्य नहीं हैं. यहां तक कि 18 फरवरी को जब जसवंतनगर में वोटिंग हो रही थी, उस दौरान काफिले पर पथराव के बाद शिवपाल ने अखिलेश पर इशारों में निशाना साधा था.

योगी से मिले थे शिवपाल

शिवपाल यादव ने इससे पहले हाल ही में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी. हालांकि यह नहीं पता चल पाया था कि दोनों के बीच मुलाक़ात में क्या बातचीत हुई. सियासी हलकों में इसको लेकर कयासों का दौर जारी है.

शिवपाल के दिल्ली में अमित शाह से मुलाक़ात की चर्चाओं ने भी ज़ोर पकड़ा था. शिवपाल ने यूपी में चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि 11 मार्च को नतीजे आने के बाद वे नई पार्टी बनाएंगे. बाद में वे अपने बयान से पलट गए थे. लेकिन लखनऊ के सियासी गलियारों में एक चर्चा ये भी है कि मुलायम और शिवपाल मिलकर नई पार्टी बना सकते हैं. 

गौरतलब है कि इससे पहले योगी आदित्यनाथ से मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव तीन बार मुलाकात कर चुकी हैं. पहली बार 18 मई को उनके नाम का एलान होने के बाद, दूसरी बार शपथ ग्रहण के अगले दिन और तीसरी बार अपनी गोशाला कान्हा उपवन में. मुलायम की पत्नी साधना गुप्ता, प्रतीक और अपर्णा को शिवपाल खेमे का ही माना जाता है.

यूपी चुनाव में सपा और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था. दोनों को मिलाकर 54 सीट (सपा-47 सीट, कांग्रेस- 7 सीट) हासिल हुई थी. वहीं भाजपा ने तीन चौथाई सीटों पर कब्जा जमाते हुए अपने सहयोगियों के साथ 325 सीटें जीत ली थीं. जबकि बसपा को केवल 19 सीटें ही मिल सकी थीं.   

First published: 18 April 2017, 14:07 IST
 
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