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सादगी के सुल्तान हैं UP के नए DGP सुलखान

सुधाकर सिंह | Updated on: 22 April 2017, 20:04 IST

1980 बैच के आईपीएस अफसर सुलखान सिंह को यूपी का नया डीजीपी बनाया गया है. सूबे के सियासी गलियारों में भी उनकी सादगी की चर्चा हो रही है. सोशल मीडिया पर भी सुलखान सिंह की सादगी को लेकर पोस्ट और कमेंट आ रहे हैं. 

अखिलेश सरकार में अप्रैल 2015 से सुलखान सिंह की तैनाती डीजी ट्रेनिंग (हेडक्वार्टर्स) के महत्वहीन पद पर थी. पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से 37 साल के करियर में उनका शुरुआती जुड़ाव रहा है. 1983-84 में बनारस शहर में जब सुलखान सिंह को एडिशनल एसपी बनाया गया, तो बच्चे-बच्चे की जुबान पर उनका नाम था. उस दौर में बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में छात्रों का आंदोलन शबाब पर था. 

उत्तर प्रदेश के नए डीजीपी कितने सादगी पसंद हैं, इसका पता इसी बात से चलता है कि उनके पास अचल संपत्ति के नाम पर महज तीन कमरों का फ्लैट और खेती के लिए मामूली जमीन है. लखनऊ शहर के अलकनंदा अपार्टमेंट में सुलखान सिंह ने लखनऊ विकास प्राधिकरण से किस्तों में घर खरीदा था. 

3 कमरों का घर, 3 लाख की ज़मीन के मालिक

कम लोगों को पता होगा कि सुलखान सिंह का ताल्लुक यूपी के सबसे पिछड़े इलाकों में से एक बुंदेलखंड से है. मूल रूप से बांदा जिले के रहने वाले सुलखान सिंह के पास 2.3 एकड़ जमीन है जो उन्होंने बांदा-फतेहपुर सीमा के पास अपने पैतृक गांव जौहरपुर में 40 हजार रुपयों में खरीदी थी. अब इस ज़मीन की कीमत महज 3 लाख रुपये ही है. 

पुलिस मेडल और राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित सुलखान सिंह को वाराणसी के बाद ही लखनऊ में बतौर एसपी पहली पोस्टिंग मिली थी. सुलखान सिंह 1997 में मीरजापुर और इलाहाबाद में डीआईजी भी रहे हैं. हालांकि उनका यह कार्यकाल काफी छोटा रहा. इसके अलावा लखनऊ जोन के आईजी और डीआईजी (लखनऊ रेंज) की भी उन्होंने जिम्मेदारी निभाई. 

पुलिस भर्ती घोटाले की जांच

यूपी पुलिस के बेहद ईमानदार अफसरों में माने जाने वाले सुलखान सिंह ने मुलायम के कार्यकाल में हुए कथित पुलिस भर्ती घोटाले की भी जांच की थी. 2007 में जब बसपा की सरकार बनी तो मायावती ने पुलिस भर्ती घोटाले की जांच उन्हें सौंपी थी. एडीजी शैलजाकांत मिश्र के साथ ही सुलखान सिंह भी इस जांच बोर्ड के सदस्य रहे.

सुलखान सिंह ने निष्पक्ष जांच करते हुए जिलों में बनाए गए कई भर्ती बोर्ड की नियुक्तियों को रद्द करने की सिफारिश की थी. जांच बोर्ड की सिफारिश के बाद प्रदेश के कई आईपीएस अफसरों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा भी दर्ज हुआ था. 

रुड़की से इंजीनियरिंग की पढ़ाई

आईआईटी रुड़की से सिविल इंजीनियरिंग में बीई करने के बाद सुलखान सिंह ने कानून की पढ़ाई की. बतौर डीजीपी उनका कार्यकाल सितंबर 2017 तक ही है. यानी पांच महीनों तक वो यूपी के डीजीपी के पद पर रहेंगे. इससे पहले वरिष्ठता को दरकिनार कर जावीद अहमद को अखिलेश सरकार ने डीजीपी बनाया था.

वरिष्ठ पत्रकार धीरेंद्र पुंडीर ने उनसे जुड़े एक वाकये का जिक्र करते हुए फेसबुक पर एक स्टेटस पोस्ट किया है. जिसमें पुंडीर ने बताया है कि सुलखान सिंह दोपहर में लंच करने के बजाए लाई-चना ही खाते हैं.

पत्रकार धीरेंद्र पुंडीर की फेसबुक वॉल से

लंच में लाई-चने की घटना

सुलखान सिंह नए डीजीपी. लगता नहीं था कि कोई इतने ईमानदार अफसर को कभी कमान देगा. लइया-चना हमेशा याद रहेगा. लखनऊ में खबर करने गया था. सोचा चलो एक दो अफसर से तो मिलता चलूं. फिर याद आया कि चलो एडीजी जेल से मिलते हैं. फोन किया और उधर से वही अपनेपन से भरी हुई आवाज शहर में आए हो क्या. चलो आए हो तो आ जाओ. मिलने पहुंच गए खाने का समय हो चुका था तो पूछा कि आपने लंच तो नहीं लिया होगा तो हमारे साथ लोगे.

मैंने जवाब दिया कि सर मैं तो दोपहर में खाना नहीं खाता हूं. उन्होंने कहा कि कोई बात नहीं जो हम खाते हैं वही खा लेना. और उन्होंने कहा कि ले आओ भाई. लेकिन अर्दली आया और बोला सर आज तो आया नहीं है. उन्होंने पूछा कि क्यों क्या हुआ वो तो कभी छुट्टी करता नहीं है. मेरी नजर में ये खाने को लेकर बातचीत लग रही थी. लेकिन अर्दली ने कहा कि सर छुट्टी तो नहीं थी लेकिन बाहर नगर निगम की गाड़ी उठाकर ले गई. इस बात पर एडीजी साहब अचानक हैरान हो गए कि वो तो लाइन से खड़ा होता है और आस-पास सफाई भी रखता है.हां सर लेकिन वो माने नहीं.

एडीजी साहब ने कहा कि कमिश्नर को फोन लगाइये. मेरी दिलचस्पी बढ़ गई कि बात लंच की हो रही है कहानी म्यूनिसपल कमिश्नर तक जा रही है. एक दम से पूछना अच्छा नहीं लगा तो चुपचाप देखता रहा और फोन मिल गया. एडीजी साहब ने कहा कि आज क्या अतिक्रमण हटाओ अभियान था क्या कमिश्मनर साहब. उधर से कुछ ऐसा ही जवाब आया जो फोन के दूर होने से पता नहीं चला. 

पत्रकार धीरेंद्र पुंडीर की फेसबुक वॉल से

लेकिन तभी एडीजी साहब ने कहा कि अभी मैं बाहर निकल कर आपको आपके ऑफिस तक पहुंचाता और रास्ते में अधिकारियों के घर के बाहर कब्जा कर बनाए गए हुए गार्डन और रास्तों को पार्किंग बना खडे हुए रईसों की गाडियों के फोटो सहित आ जाता हूं ताकि आपको साथ ही लेकर हटाओ.

उधर से फिर कुछ आवाज थी लेकिन समझ में नहीं आई. एडीजी साहब ने कहा कि कमिश्नर साहब एक लइया-चने वाले को उठाकर काफी कानून का पालन कर लिया. काफी कॉपी भर गई होगी एसीआर की. एक लइया चना वाला जो सरकारी कर्मचारियों को कुछ पैसे में दोपहर में पेट भर देता है उसका कब्जा काफी बड़ा गुनाह लगा होगा. मुझे लगता है कि आपको पहुंचने वाली राशि कुछ कम हो गई होगी. लेकिन आप तो उस कुएं में बदल रहे हैं जो पानी को खुद ही पा रहा है. और आधे घंटे बाद लइया-चना वाला वापस अपनी जगह पर लोगों के पेट भर रहा था और वही से एक गर्मागर्म लइया-चने का लिफाफा हमारी टेबिल पर भी आ गया.

तब पूछने पर पता चला कि यही लइया-चना दोपहर में एडीजी साहब खाते हैं. ये मेरी सुलखान सिंह साहब के साथ हुई एक मुलाकात थी. फिर तो कई मुलाकात हुई और अपने मन में ये तस्वीर साफ थी कि अपनी साफगोई और ईमानदारी से बदनाम हो चुके सुलखान सिंह को कौन डीजीपी बनाएगा.

इंवेस्टीगेशन की रिपोर्टिंग करने के चलते अक्सर पुलिसअधिकारियों से साबका पड़ता ही रहा है. ऐसे में जिस भी अधिकारी से बात की हमेशा एक ही बात सुलखान सिंह का परिचय रहा कि बहुत ईमानदार अफसर हैं और कड़क भी. हालांकि कड़कपन उनके काम करने के तरीकों में होगा व्यवहार में तो हमेशा नर्म. और बातचीत में काफी बार इस बात पर भी बात होती थी कि सरकार को आखिर कैसे अधिकारी चाहिए जो मंत्रियों की झोली भर दे और काले को सफेद और सफेद को काला कह दे सरकार के इशारे पर.

अब तो काफी समय से बात नहीं हुई लेकिन योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी कई लोगों से बात हुई लेकिन मुझे नहीं लगा कि सुलखान सिंह को बनाने का जोखिम आज-कल की पॉलिटिक्स उठा सकती है क्या. लेकिन आज शाम को इस खबर ने एक यकीन तो दिला ही दिया कि आपको हौसला बनाए रखना चाहिए. कभी न कभी तो आपको रास्ता मिल ही जाता है. अब उम्मीद करता हूं सुलखान सिंह अपने विश्वास को आधार बना कर इस समय वर्दी और बिना वर्दी के बीच कुछ तो अंतर दिखा पाएंगे. और अक्सर गुंडों से ज्यादा डरावनी बनती जा रही यूपी पुलिस के अंदर कोई बदलाव पैदा करेंगे. 
( मैं किसी पुलिस अफसर के लिए कोई लेख लिखता नहीं हूं लेकिन सुलखान सिंह मेरी नजर में उत्तर प्रदेश की पुलिस में एक विश्वास का प्रतीक हैं इसलिए ये लेख उनके साथ हुए इंटरक्शन पर है. आगे उनका काम जनता को बताएगा कि मैं सही था या गलत. )

First published: 22 April 2017, 14:30 IST
 
सुधाकर सिंह @sudhakarsingh10

कैच हिंदी टीम, वो अमीर हैं निज़ाम-ए-जहां बनाते हैं, मैं फ़क़ीर हूं मिज़ाज-ए-जहां बदलता हूं...

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