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उत्तर प्रदेशः शिक्षामित्रों को सुप्रीम कोर्ट से झटका, योगी सरकार को राहत

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 May 2020, 15:09 IST

Supreme Court gave relief to UP Government: गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार (UP Government) को राहत देते हुए शिक्षामित्रों की याचिका (Plea) को खारिज (Rejected) कर दिया. इसी के साथ राज्य में 69 हजार प्राथमिक शिक्षकों (Primary Teachers) की भर्ती (Recruitment) का रास्ता साफ हो गया. याचिकाकर्ताओं की दलील सुनने के बाद जस्टिस उदय उमेश ललित, जस्टिस शांतनु और जस्टिस विनीत शरण की पीठ ने याचिका खारिज कर दी और इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर दखल देने से इनकार कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए वहीं बेसिक शिक्षा बोर्ड की ओर से राकेश मिश्रा सुप्रीम कोर्ट में अपनी दलील रखने पहुंचे थे, लेकिन दोनों को कुछ बोलने की जरूरत ही नहीं पड़ी. शिक्षामित्रों की तरफ से मुकुल रोहतगी ने अदालत में दलीलें रखते हुए कहा कि, एकल पीठ ने हमारे दावे के समर्थन में फैसला दिया था, लेकिन डिविजन ने हमारे पक्ष को पूरी तरह से नहीं सुना.


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वहीं वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि यह मामला हमारी संविदा के नवीकरण और नियुक्ति की प्रक्रिया में लगातार किए गए बदलाव को भी लेकर है. उनकी इन दलीलों के बाद न्यायमूर्ति ललित ने पूछा कि कितने शिक्षामित्र को नियुक्त किया गया था? तब जवाब में रोहतगी ने कहा कि 30 हजार, फिर सरकार ने शिक्षामित्रों की बजाय 69 हजार प्राथमिक शिक्षकों की नई नियुक्ति निकाली.

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वहीं शिक्षामित्रों की तरफ से दलील देते हुए रोहतगी ने कहा कि परीक्षा के बाद नया कटऑफ भी तय किया गया. इसपर न्यायमूर्ति ललित ने पूछा कि क्या कटऑफ विज्ञापन का हिस्सा था? जवाब में रोहतगी ने कहा कि नहीं, सात जनवरी को परीक्षा होने के बाद न्यूनतम कटऑफ तय किया गया था. शिक्षकों के लिए 60-65 प्रतिशत और शिक्षामित्रों के लिए 40-45 प्रतिशत तय था.

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इस पर न्यायमूर्ति ललित ने कहा कि यानी आपके दो सुझाव हैं कि बीएड कभी भी अर्हता नहीं थी और परीक्षा के बाद कटऑफ तय करना गलत है. इसका जवाब देते हुए वरिष्ठ वकील ने कहा कि शिक्षामित्रों को बहुत कम वेतन मिल रहा है. इसके बाद न्यायमूर्ति ललित ने कहा कि मतलब आप चाहते हैं कि 45 फीसदी सामान्य और 40 फीसदी आरक्षित वर्ग के लिए किया जाए. जवाब में रोहतगी ने कहा हां, इससे कई लोगों को मौका मिल सकेगा. दलीलें सुनने के बाद शीर्ष कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया.

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First published: 21 May 2020, 15:09 IST
 
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