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IAS सुसाइड मिस्ट्री: अनुराग तिवारी के परिवार को बड़ी साज़िश का शक

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 May 2017, 11:42 IST
Anurag Tiwari

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में संदिग्ध अवस्था में मृत पाए गए आईएएस अनुराग तिवारी की मौत का मामला उलझता जा रहा है. अनुराग तिवारी के भाई भाई मयंक ने आरोप लगाते हुए कहा है कि अनुराग की हत्या  सुनियोजित तरीके से की गई है.

परिवार वालों ने इस घटना को कर्नाटक से जोड़ दिया है. उनका कहना है कि अनुराग वहां खाद्य विभाग से जुड़े कई घोटालों की जांच कर रहे थे, इसी वजह से उनकी हत्या की गई है. इंसाफ के लिए अब परिवार पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलने की तैयारी में है. 

दो महीने पहले जताया था अंदेशा

अनुराग के भाई मयंक तिवारी ने बताया कि अब साफ हो गया कि बड़े भाई की हत्या बड़े ही सुनियोजित तरीके से की गई है. उनका कहना है कि भाई की मौत के पहले बड़े भाई और मां ने उनको कई बार फोन किए थे, लेकिन पुलिस ने उनका मोबाइल बरामद कर जब उन्हें सौंपा तो उसमें से हम लोगों के फोन का भी डाटा डिलीट पाया गया.

उन्होंने कहा कि जिस फॉरेंसिक लैब में जांच के लिए सैंपल भेजा जाना है, उसके डायरेक्टर पहले से ही दागी हैं. उनके खिलाफ जांच चल रही है. वह पटना हाईकोर्ट से जमानत पर हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि अनुराग के पोस्टमार्टम में केवल खानापूर्ति ही की गई, ताकि हत्या के सही कारणों का पता न चल सके. परिवार के लोग बताते हैं कि दो महीने पहले ही आईएएस अनुराग ने अंदेशा जताया था कि सब कुछ ठीक नहीं है. 

5 महीने से कर्नाटक सरकार ने रोकी थी सैलरी

परिवार वालों के अनुसार अनुराग की पांच माह की सैलरी भी कर्नाटक सरकार द्वारा रोक दी गई थी. बताया गया कि हम लोग कर्नाटक जाना चाहते थे, लेकिन अनुराग ने यह कहकर मना कर दिया कि अभी कर्नाटक के हालात सही नहीं है.

परिवार के लोगों का आरोप है कि आम आदमी की मौत होती है तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण आसानी से पता चल जाता है, लेकिन एक आईएएस की मौत की वजह साफ नहीं हो सकी, यह बात समझ से परे है. परिवार वालों का कहना है कि अनुराग बेहद ईमानदार छवि के अधिकारी थे और कई घोटालों से संबंधित जांचें भी उन्हीं के द्वारा की जा रही थी. जिसमें कई रसूखदार चेहरे और ब्यूरोक्रेट्स के बेनकाब होने का अंदेशा था. शायद यही कारण कि उनकी हत्या कर दी गई.  

17 मई को मिला था अनुराग का शव

फॉरेंसिक विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर एसके रावत के नेतृत्व में लखनऊ के मीराबाई मार्ग पर जांच के लिए गठित एसआइटी की टीम मौजूद थी. फॉरेंसिक टीम ने 17 मई की सुबह करीब आईएएस अनुराग का शव सबसे पहले देखने वाले नरही चौकी के सिपाही हरवीर सिंह से पूछताछ की.

हरवीर ने बताया कि अनुराग का शव बीच सड़क तिरछा पड़ा था. वह औंधे मुंह पड़े थे. दाहिना हाथ सिर के नीचे की ओर था और बायां हाथ पेट के पास सड़क से छू रहा था. इस पर फॉरेंसिक टीम ने आइएएस अनुराग ठाकुर के कद की करीब पांच फीट सात इंच की डमी को मौके पर उसी अवस्था में डाला और उसकी तस्वीरें भी लीं. सड़क की चौड़ाई से लेकर बीच सड़क से शव की दूरी और गेस्ट हाउस से घटनास्थल की दूरी को भी नापा गया. 

साज़िश की आशंका

जांच के बाद पाया गया कि शव गेस्ट हाउस से करीब 194 फीट की दूरी पर पड़ा था. फॉरेंसिक टीम ने उस स्थान से खून का नमूना भी लिया, जहां अनुराग का शव पड़ा था. टीम राज्य अतिथि गृह के कमरा नंबर 19 में गई और वहां भी छानबीन की.

वहीं दूसरी ओर अनुराग तिवारी की मौत में आइजी रूल्स और मैनुअल अमिताभ ठाकुर को बड़ी साजिश की आशंका नजर आ रही है. वरिष्ठ आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने इस मामले में डीजीपी सुलखान सिंह से जांच का अनुरोध किया है. आईपीएस अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर ने कहा है कि कर्नाटक कैडर के आईएएस अनुराग तिवारी की मौत में उच्च स्तरीय षड्यंत्र किया गया है.

First published: 22 May 2017, 11:42 IST
 
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