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जब हम ऑस्ट्रेलिया को एक्सपोर्ट करते हैं मेट्रो कोच, तो फिर चीन से क्यों मंगाए?

पत्रिका ब्यूरो | Updated on: 8 December 2016, 19:34 IST

हाल ही नोएडा-ग्रेनो मेट्रो कॉरीडोर में चलने वाली ट्रेनों की तस्वीरें सार्वजनिक की गई. साथ उनके बारे में बताया गया कि इन ट्रेनों का निर्माण चाइना की सीआरआरसी कंपनी के माध्यम से किया गया है. जबकि भारत से इस साल ही ऑस्ट्रेलिया को मेड इन इंडिया मेट्रो कोच भेजे गए हैं. ताज्जुब की बात तो ये है जब हमारे देश में मेट्रो कोच और ट्रेनों का निर्माण हो रहा है, तो बाहर खासकर चाइना जैसे देशों से कोच क्यों मंगाए जा रहे हैं?

देश में बन रहे हैं कोच तो चाइना से क्यों?

28 जनवरी 2016 को मुंबई पोर्ट से ऑस्ट्रेलिया में मेट्रो कोच भेजे गए. बताया गया था कि ये सभी कोच बड़ोदरा में तैयार किए गए थे. अगले ढाई सालों में इंडिया से ऑस्ट्रेलिया के लिए और मेट्रो कोच भेजे जाएंगे. देश में मेट्रो कोच की मैन्यूफैक्चरिंग हो रही है. इसका निर्माण बड़ोदरा के सावली गांव के प्लांट में हो रहा है. ये काम बंबारडियार और एबीबी नाम की कंपनी कर रही है. 

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जानकारों के अनुसार देश में इस तरह के तीन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लग चुके हैं. अगले कुछ ही महीनों में इंडिया में बनने वाले मोनो रेल कोच ब्राजील में भेजे जाएंगे. वहीं, डीएमआरसी के लिए भी देश की ये मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स काम कर रही हैैं. अगले पांच सालों में देश को 2000 मेट्रो कोचों की जरुरत होगी. ऐसे में ये मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स काफी कारगर साबित होंगी.

मेक इंडिया कैंपेन को झटका

ऐसे में एनएमआरसी का चाइना की कंपनी से मेट्रो कोच मंगवाना बड़ा सवाल खड़े कर रहा है. इससे देश की मेक इन इंडिया योजना को बड़ा झटका लग सकता है. जानकारों के अनुसार देश में जब इस तरह की योजना पर काम चल रहा है तो देश के इस तरह सर्विस प्रोवाइडर पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए. 

आपको बता दें देश में मेक इंडिया नाम की योजना शुरू की गई थी जिसमें स्वदेशी सामान को प्रमोट करने की बात की कही गई थी. जिसमें सरकार द्वारा मदद करने की बात भी कही गई थी. अगर आने वाले समय में भी इसी तरह की बातें होती रहेंगी तो मेक इंडिया योजना हाशिए पर चली जाएगी.

क्या कह रहे हैं एनएमआरसी के अधिकारी

जब इस बारे में एनएमआरसी के जीएम पीडी उपाध्याय से बात की गई तो उन्होंने कहा कि हमारी ओर से मेट्रो कोच की ग्लोबल टेंडरिंग की गई थी. टेंडर में जिन्होंने अपनी कॉस्ट कम रखी थी उसी को लिया गया है. उन्होंने इंडिया में मैन्युफैक्चरिंग पर बात करते हुए कहा कि यहां पर कोई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट नहीं है. यहां पर कुछ पार्ट बनते हैं. उसके बाद बाहर से आने वाले सामान को असेंबल किया जाता है.

First published: 8 December 2016, 19:34 IST
 
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