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लखनऊ : मुस्लिम युवक से शादी करने वाली महिला के साथ पासपोर्ट ऑफिस ने की बदतमीजी, सुषमा से मांगी मदद

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 June 2018, 10:56 IST
(प्रतीकात्मक फोटो)

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पासपोर्ट ऑफिस में एक महिला का इसलिए उत्पीड़न किया गया क्योंकि उसने एक मुस्लिम से शादी की है. पीड़ित महिला ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मदद मांगी है. महिला ने लखनऊ के रतन स्क्वायर स्थित पासपोर्ट सेवा केंद्र के पासपोर्ट अधीक्षक पर धर्म के नाम पर अपमानित करने का आरोप लगाया है. इस मामले में पीड़िता ने प्रधानमंत्री कार्यालय औप विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को ट्वीट किया है.

लखनऊ निवासी तन्वी सेठ ने साल 2007 में अनस सिद्दीकी से शादी की थी. उनकी 6 साल की एक बच्ची भी है. तन्वी का दावा है कि बुधवार को वे तीनों पासपोर्ट सेवा केंद्र में पासपोर्ट बनवाने गए. शुरुआती दो काउंटर्स पर उनके आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो गई, लेकिन जब वह तीसरे काउंटर पर पासपोर्ट अधीक्षक विकास मिश्र के पास गईं तो उन्होंने उनकी वैवाहिक स्थित पर सवाल उठाने शुरु कर दिए. यही नहीं मिश्र ने उन्हें धर्म के नाम पर अपमानित भी किया. क्योंकि शादी के बाद तन्वी ने अपना उपनाम नहीं बदला.

तन्वी ने ये भी आरोप लगाए कि वहां मौजूद कुछ अन्य कर्मचारियों ने भी उनकी खल्ली उड़ाई. यही नहीं जब वो काउंटर सी-5 पर पहुंची तो वहां भी उनके साथ ऐसा ही बर्ताव किया गया. तन्वी का आरोप है कि विकास मिश्र ने दस्तावेज देखने के बाद मुसलमान से शादी के बारे में सवाल जवाब शुरु कर दिए. नका यह रवैया तन्वी को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा. इसी दौरान उनके पति अनस सिद्दीकी भी उनके पास पहुंच गए.

तन्वी ने आरोप लगाया है कि विकास मिश्र ने उन्हें अपमानित करते हुए दोनों को एक ही सरनेम करने की सलाह दे डाली. जिसका तन्वी और अनस ने विरोध किया. तन्वी ने इस मामले में ट्वीट कर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मदद की गुहार लगाई है.

हालांकि बाद में एपीओ विजय द्विवेदी ने विभाग की ओर से माफी मांगते हुए उनसे लिखित शिकायत मांगी है. अधीक्षक के बर्ताव से आहत तन्वी ने बताया कि उन्होंने पूरे प्रकरण को लेकर पीएमओ और विदेश मंत्री से गुहार लगाई है. वहीं रीजनल पासपोर्ट अफसर पीयूष वर्मा का कहना है कि उन्‍हें अभी इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है.

उन्होंने कहा कि हिंदू पत्नी और मुस्लिम पति के अब तक सैकड़ों पासपोर्ट बन चुके हैं. पासपोर्ट में पति-पत्नी के अलग धर्म के होने से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन पति और पत्नी का सरनेम अलग होने पर नियमानुसार आवेदक को एक सादे कागज पर लिखित घोषणा करनी होती है, जिसमें उनकी शादी और सरनेम का जिक्र जरूरी होता है.

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First published: 21 June 2018, 10:48 IST
 
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