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इस व्यक्ति को 93 साल की उम्र में 5,230 लोगों के मर्डर का ठहराया गया दोषी, मिली दो साल की सजा

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 July 2020, 22:17 IST

जर्मन की एक अदालत ने गुरुवार को 93 वर्षीय एक व्यक्ति को हजारों नाजियों की हत्या में मदद करने के लिए दोषी ठहराया है और उसे दो साल की निलंबित जेल की सजा दी गई है. इस व्यक्ति का नाम ब्रूनो डे है और वो 75 साल पहले साल 1944 से 45 के दौरान स्टथऑफ कंसेनट्रेशन कैंप में बतौर गार्ड काम करता था. बता दें, जर्मनी में नाजी दौर के अपराधियों को सजा देने की प्रकिया कई सालों से चली आ रही है.

हैम्बर्ग राज्य की एक अदालत ने ब्रूनो डे को कम से कम 5,232 लोगों की हत्या में सहायता करने और अपहरण करने का दोषी पाया है, माना जाता है कि इन सभी लोगों की जान अगस्त 1944 से अप्रैल 1945 तक पोलैंड के डैंस्क के पूर्व में स्थित स्टथऑफ कंसेनट्रेशन कैंप में गई है.

ब्रूनो डे को किशोर न्यायालय में पेश किया गया था, क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान वो केवल 17 वर्ष के थे, जहां अदालत ने उन्हें दो साल की सजा दी. हालांकि, इस कैंप में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों ने इस सजा को काफी कम माना है.

अंतर्राष्ट्रीय ऑशविट्ज़ समिति के क्रिस्टोफ हेबनर ने इस सजा के ऐलान के बाद कहा,"यह असंतोषजनक है और बहुत देर से आया है." नाजी युग के अपराधों की सजा देने के लिए एक विशेष कार्यालय बनाया गया है, जहां ऐसे उम्रदराज लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाया जाता है जो नाजी युग के दौरान हिटलर के साथी रहे, ताकि उन्हें सजा मिल सके और ब्रूनो डे का केस उसमें सबसे नया है.

जर्मन मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हैम्बर्ग राज्य अदालत में ब्रूनो डे एक व्हीलचेयर पर बैठे थे और उन्होंने कोरोना वायरस के असर के कारण अपने मुंह पर मास्क लगाया हुआ था. वहीं जब न्यायाधीश उनकी सजा पढ़ रहे थे तब उन्होंने अपना चेहरा नीचे झुका रखा था.

जज ऐनी मियर-गोयरिंग ने अपना फैसले पढ़ते हुए ब्रूनो डे को कहा,"आप अभी भी अपने आप को एक मात्र पर्यवेक्षक के रूप में देखते हैं, जबकि वास्तव में आप इस मानव निर्मित नरक के लिए एक साथी थे."

खबरों के अनुसार ब्रूनो डे ने अपने 9 महीने से अधिक चले ट्रायल के दौरान यह बताया था कि उसके पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं था. हालांकि, उनसे इन हत्याओं से खुद को अलग बताया था और कहा था कि उसे नहीं पता था कि कैंप के अंदर क्या होता है. लेकिन बाद में उसने कबूल किया था कि उसने गैस चैंबर्स में बंद लोगों के चिल्लाने की आवाजें सुनी थीं और बाद में बाहर आते शवों को भी देखा था. इसके बाद उसे कभी भी चैन की नींद नहीं आई. उसे हर रात डरावने सपने आते थे.

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First published: 24 July 2020, 22:00 IST
 
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