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कैच फैक्ट चेक : क्या 19 साल से मौजूद है कोरोना वायरस की दवा ? जानिए वायरल पोस्ट की सच्चाई

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 May 2020, 17:23 IST

दुनियाभर में कोरोना वायरस की असरदार दवा बनाने के लिए लगातार कोशिशें जारी हैं. कई देशों में कोरोना वायरस के वैक्सीन पर अनुसंधान किये जा रहे हैं लेकिन सोशल मीडिया में कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि दरअसल इसकी वैक्सीन पहले से ही मौजूद है लेकिन फिर भी इलाज नहीं है. आज जानते हैं आखिर इस दावे की सच्चाई क्या है.

दावा : 19 साल से मौजूद है कोरोना वायरस की दवा

सच : वायरल पोस्ट में जिस दवा का जिक्र हो रहा है, वह दवा डॉग के लिए है.

लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर फोटो और वीडियो एडिट कर वायरल करने का चलन लंबे समय से चल रहा है. अक्सर किसी पुरानी फोटो और वीडियो को नया बताकर उसे शेयर किया जाता है. कई बार ये सामग्री सच्चाई कोसों दूर होती हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर लोग बिना परखे उसे शेयर कर देते हैं. हालही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की गई है, जिस पर केनाइन कोरोना वायरस वैक्सीन (Corona Virus Vaccin) नाम का एक लेबल है.

इस पोस्ट में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस की वैक्सीन 2001 से मौजूद थी और 19 साल बाद कहा जा रहा है कि इसकी अभी कोई वैक्सीन नहीं बनी है. हमारी फैक्ट चेक टीम ने इस दावे की जांच की तो सामने आया कि यह दावा सरासर गलत है. इस पोस्ट की पड़ताल करने के बाद यह सच्चाई सामने आई कि पोस्ट में दिखाई गई वैक्सीन सही है, लेकिन यह पशुओं के इस्तेमाल के लिए है. इसका कोरोना वायरस से  कोई संबंध नहीं है.

 

ये किया जा रहा है शेयर

फेसबुक पर यूजर मिजाइल बेनिटेज की ओर से शेयर की गई पोस्ट में लिखा है कि "यह 2001 से मौजूद थी, अब मुझे यह बताएं कि 19 साल बाद कहा जा रहा है कि कोई वैक्सीन नहीं है." इस पोस्ट में केनाइन कोरोना वायरस वैक्सीन नाम का लेबल दिखाया गया है. इस पोस्ट को अब तक करीब 31 हजार लोगों ने शेयर किया है. वहीं करीब 1 हजार से अधिक लोगों ने लाइक किया है.

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हमारी सहयोगी वेबसाइट 'राजस्थान पत्रिका की फैक्ट चैक टीम ने सोशल मीडिया पर इस दावे की जांच परख शुरू की तो पाया कि यह नोबिवाक 1-सीवी है, जो मर्क एंड कंपनी की एक सहायक कंपनी की ओर से बिक्री किए जाने वाला वैक्सीन है. यह कुत्तों को केनाइन कोरोना वायरस या सीसीवी से बचाने के लिए इस्तेमाल की जाती है.

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पशु चिकित्सा कंपनी वीसीए हॉस्पिटल्स ने बताया ''केनाइन कोरोना वायरस डिजीज, जिसे सीसीओवी भी कहा जाता है, डॉग या विशेष तौर पर पिल्लों में ज्यादा पाया जाता है. केनाइन कोरोना वायरस आमतौर पर कम समय के लिए होता है, लेकिन जिन कुत्तों को यह बीमारी हो जाती है, उन्हें कुछ दिनों के लिए पेट की परेशानी से जूझना पड़ता है''. उन्होंने बताया "केनाइन कोरोना वायरस सार्स-सीओवी-डब्ल्यू जैसा वायरस नहीं है, जो कोरोना वायरस का कारण बनता है. सीसीओवी डॉग में गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल की समस्या पैदा करता है.

कोरोना की अभी नहीं बनी वैक्सीन

अभी कोविड-19 की कोई वैक्सीन नहीं बनी है. हालांकि कई देशों में वैक्सीन के लिए क्लीनिकल ट्रायल चल रहे हैं. दिसंबर 2019 में चीन के वुहान में इस वायरस के शुरू होने से पहले कोविड-19 एक अज्ञात संक्रमण था. सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के अनुसार वर्ष 1960 के दशक के बीच में मानव कोरोना वायरस की पहचान की गई थी. डॉक्टर ने बताया कि "वायरल पोस्ट में दिखाया गया वैक्सीन वर्तमान कोरोना वायरस से अलग वायरस के इलाज के लिए है. इससे कोविड-19 का इलाज नहीं किया जा सकता है. यह डॉग के इलाज के लिए है. यह दवा मनुष्यों के लिए नहीं है.

हमारी फैक्ट चैक टीम ने इस दावे की जांच की तो पता चला कि पोस्ट में दिखाया गया केनाइन कोरोना वायरस वैक्सीन असली है, लेकिन यह डॉग के लिए इस्तेमाल के लिए है और हाल के वर्तमान कोरोना वायरस से संबंधित नहीं है. यह फेक न्यूज़ है.

First published: 18 May 2020, 17:09 IST
 
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