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IIT कानपुर के इंजीनियरिंग के छात्र ने फ्लाइट में जुगाड़ से बचाई यात्री की जान

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 May 2018, 12:39 IST

देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान आईआईटी के स्टूडेंट्स दुनियाभर में अच्छे इंजीनियर्स के लिए जाने जाते हैं. यहां से निकलने वाला हर स्टूडेंट्स इंजीनियरिंग के अलावा भी कई फील्ड्स में बुलंदियां हासिल करते हैं. ऐसा ही कुछ किया है आईआईटी कानपुर से बीटेक कर रहे एक छात्र ने जिससे हवाई सफर के दौरान एक डॉक्टर का काम किया.

दरअसल, इस IIT के इस स्टूडेंट ने हवाई सफर कर रहे एक डायबिटीज के मरीज को अपने इंजीनियरिंग कौशल से जीवनदान दिया. इस छात्र की कहानी को आईआईटी कानपुर की एक इन-हाउस पत्रिका में लिखा गया है.

21 साल के कार्तिकेय मंगलम कानपुर आईआईटी से इलैक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक कर रहे हैं वे बीटेक के फाइनल ईयर के स्टूडेंट हैं. फरवरी महीने में कार्तिकेय मंगलम जिनेवा से मास्को होते हुए नई दिल्ली का हवाई सफर कर रहे थे. इसी दौरान उन्हें लगा कि उनके पीछे दूसरी लाइन वाली सीट पर बैठे एक शख्स को मेडिकल सहायता की जरूरत है.

कार्तिकेय के मुताबिक वो शख्स टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित था और वह मास्को के शेरेमेटेवो इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के दौरान अपनी इंसुलिन पंप भूल गया था. उसका ब्लड शुगर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया था. उसने पांच घंटे पहले इंसुलिन की खुराक ली थी. ऐसे में उसे इंसुलिन कार्टेज की बहुत जरूरत थी. जिससे वह खुद को इंसुलिन दे सकता था.

इसी फ्लाइट में एक डॉक्टर भी सफर कर रहा था. उसे भी डायबिटीज की परेशानी थी. डॉक्टर के पास इंसुलिन थी और वह पेन एस्क्यू कॉन्ट्रैक्शन का भी इस्तेमाल करता था. कार्तिकेय बताते हैं कि पीड़ित शख्स की इंसुलिन कार्टिज डॉक्टर की इंसुलिन पेन में फिट नहीं हो सकती थी

ऐसे में विमान आपातकालीन लैंडिंग की तैयारी कर रहा था तभी कार्तिकेय पीड़ित शख्स के पास पहुंच गए. उन्होंने देखा कि डॉक्टर अपनी पेन को पीड़ित शख्स की इंसुलिन कार्टिज में लगाने की कोशिश कर रहा है.

कार्तिकेय ने सोचा कि क्या वह उसे अस्थाई तौर पर लगा सकते हैं. उसके बाद उन्होंने हवाई जहाज के वाई-फाई का इस्तेमाल करते इंसुलिन पेन का इंजीनियरिंग डिजाइन देखा. जिसमें उन्होंने पाया कि डॉक्टर की इंसुलिन पेन में एक स्पिंग गायब है. उसके बाद उन्होंने एयर होस्टेस से बॉलपॉइंट पेन मांगा. जिसमें आमतौर पर एक स्पिंग लगी होती है.

कार्तिकेय बताते हैं कि उन्होंने इंसुलिन पेन को ठीक किया और वापस डॉक्टर को दे दिया. उसके बाद डॉक्टर ने निडिल बदली और पीड़ित थॉमस इंसुलिन का इंजेक्शन लगा दिया. करीब 15 मिनट बाद पीड़ित शख्स का शुगर लेवल बढ़ना कम हो गया और बाद में कम होने लगा.

जब उनकी फ्लाइट दिल्ली में लैंड कर गई तो पीड़ित शख्स को गुड़गांव के मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. कार्तिकेय बताते है कि पीड़ित शख्स ने हमें थैंक्स कहा और एम्सटर्डम में फ्री बीयर पिलाने का वादा किया.

आईआईटी कानपुर ने अपने ट्विटर पेज पर 7 मई को कार्तिकेय की इस कहानी के बारे में लिखा है. जिसे टाइटल दिया है 'इंजीनियर जिंदगी भी बचा सकते हैं’ कार्तिकेय कहते हैं कि इस घटना ने उन्हें इंजीनियरिंग के बुनियादी जानकारी का अहसास करा दिया.

आईआईटी कानपुर द्वारा किए गए इस ट्वीट पर यूजर्स खूब कमेंट्स कर रहे हैं.

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First published: 14 May 2018, 12:42 IST
 
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