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कभी झुग्गी में गुजरी थी इस महिला की जिंदगी, आज कैंसर रिसर्च सेंटर में है वैज्ञानिक

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 August 2018, 14:30 IST
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खानाबदोश और शरणार्थी लोगों की जिंदगी आसान नहीं होती, ऐसे में यहां की कोई लड़की तरक्की करते हुए इतनी आगे निकल जाए तो आपको यकीनन हैरानी होगी. ऐसी ही कुछ कहानी है डॉक्टर रेखा की जो अब कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट में वैज्ञानिक हैं. डॉक्टर दिव्या का बचपन मुंबई की एक छोटी सी चॉल में बीता. जहां उनके माता पिता उन्हें लेकर रहा करते थे.

डॉक्टर दिव्या का सफर इतना आसान नहीं था, उनके मां-बाप जिस चॉल में रहते थे वहां सिर्फ एक छोटा सा कमरा था. इसी छोटे से कमरे में नन्ही दिव्या रहा करता थीं. दिव्या को पढ़ाने और उन्हें हिम्मत देने के लिए उनकी मां कभी पीछे नहीं हटी, दिव्या की मां ने दिन रात एक कर बेटी को पढ़ाया लिखाया और इस काबिल बनाया कि दुनिया में वो उनका नाम रोशन कर सके.

डॉक्टर दिव्या की कहानी को फेसबुक पर ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे नाम के एक पेज पर शेयर किया गया है. जो कभी मुंबई की तंग गलियों की एक छोटी सी चॉल में रहती थीं. दिव्या अब एक कैंसर रिसर्च सेंटर में वैज्ञानिक हैं. डॉक्टर दिव्या की इस कहानी की पोस्ट अब सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रही है.

तमाम यूजर्स डॉक्टर दिव्या की इस कहानी को शेयर भी कर रहे हैं. दिव्या की मां ने उनका हर कदम पर साथ दिया, चाहे वो पढ़ाई हो या उन्हें साहस देने का. वहीं डॉक्टर दिव्या की मां ने कड़ी मेहनत की, जिससे वो बेटी को पढ़ा लिखाकर इस काबिल बना सकें कि वो फिर कभी इस चॉल में ना आए.

दिव्या ने भी मां को उदास नहीं किया और उनके हर सपने को साकार कर दिखाया, दिव्या को जब डॉक्ट्रेट की डिग्री मिली तब वहां उनकी मां भी मौजूद थी, बेटी को सम्मान मिलता देख उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक आए.

फेसबुक पर शेयर हो रही स्टोरी में डॉक्टर दिव्या कहती हैं कि मेरी मां ने मुझे दो रूल्स सिखाए, कि सबसे पहले परिवार, दूसरा ये कि दुनिया में बेहतर से बेहतर करो. जो कुछ समय बाद हमारे पास और बेहतर होकर वापस लौटेगा. डॉक्टर दिव्या बताता हैं कि जब उनका परिवार मुंबई आता तो उनके पास रहने को मकान नहीं था, वो रेलवे कॉलोनी के एक रूम में रहा करते थे. उनकी मां अनपढ़ थी लेकिन बेटी को पढ़ा-लिखाकर काबिल बनाना चाहती थीं. वो पांच भाई बहन थे, उनकी मां ने दिव्या को इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ने को भेजा था.

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First published: 19 August 2018, 14:30 IST
 
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