Home » वायरल न्यूज़ » Pakistan Rooster released from police custody after eight months
 

पाकिस्तान से सामने आया हैरान कर देने वाला मामला, आठ महीने बाद पुलिस हिरासत से रिहा हुआ मुर्गा

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 July 2020, 20:25 IST

पाकिस्तान में मुर्ग़ें की लड़ाई करवाना गैरकानूनी है और इसको लेकर सजा का भी प्रावधान है. अगर कोई व्यक्ति मुर्गों की लड़ाई करवाता हुआ पकड़ा जाता है तो उसे एक साल तक की जेल हो सकती है. कुछ महीने पहले पाकिस्तान के सिंध प्रांत के ज़िला घोटमी में जारवाड़ पुलिस स्टेशन के जवानों ने दो दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लिया था. हालांकि, कुछ दिनों बाद इन लोगों को जमानत मिल गई लेकिन पुलिस ने इन लोगों के साथ जो पांच मुर्गे पकड़े थे, उनका कोई मालिक सामने नहीं आया जिसके कारण पुलिस ने उन्हें थाने में ही हिरासत में रखा हुआ था.

हालांकि, बीते दिनों घोटकी के स्थानीय निवासी ज़फ़र मीरानी ने सिविल जज की अदालत में अपील करते हुए कहा कि वो बीते कुछ दिनों में कराची में रह रहे थे, और निजी काम में व्यस्त थे जिसके कारण वो मुर्गे के मालिक होने का दावा नहीं कर पाए. इसके बाद गुरूवार को अदालत ने पुलिस को मुर्गे को रिहा करने का आदेश दिया और फिर मुर्गे को रिहा करके उसके मालिक को सौंप दिया गया.


बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, मामले में थाना प्रभारी मुमताज़ सिरकी ने कहा,"अभियुक्त तो ज़मानत पर रिहा हो गए थे लेकिन ये मुर्ग़े केस प्रोपर्टी की हैसियत से पुलिस के पास रह गए थे और जब तक अदालत इन पर कोई फ़ैसला नहीं करती तब तक उन मुर्ग़ों को सही-सलामत रखने की ज़िम्मेदारी थाने की थी. थाने में उन मुर्ग़ों को लॉकअप या मालख़ाने में नहीं रखा गया था, बल्कि उन्हें खुली जगह में रखा गया था, लेकिन उनकी टांग में रस्सी बांध दी गई थी."

वहीं रिपोर्ट की मानें तो पुलिस की मुश्किल यह थी कि यह मुर्गे रोजाना सौ रूपये का बाजरा खा जाते थे और पुलिसवालों को यह पैसे अपनी जेब से देने पड़ते थे. थाने के एक पुलिसअधिकारी को बकायद इन मुर्गों की देखभाल की जिम्मेदारी दी गई थी और अगर मुर्गे बीमार पड़ते थे तो उन्हें डॉक्टरों को भी दिखाया जाता था. वहीं एक पुलिसकर्मी ने बताया कि इन मुर्गों को कुत्तों से बचाना भी एक चुनौती होती थी, क्योंकि अगर मुर्गे को कुछ होता तो अदालत की नाराजगी पुलिसवालों को उठानी पड़ती.

पाकिस्तान के एक वकील हसन पठान ने बताया कि इस मामले अगर ऐसे मामले में कोई मवेशी पकड़ा जाता है तो उसे सरकारी कैटल फार्मं में भेज दिया जाता है लेकिन परिंदो और मुर्गों को लेकर कोई आधिकारिक तौर पर आदेश नहीं दिया गया है. हसन पठान ने बताया कि आमतौर पर पुलिस ऐसे मामलों में परिंदो और मुर्गों को पुलिस मालिक को सौंप देती है या फिर उनका इस्तेमाल कर लेती है, ऐसे कम ही मामले होते हैं जिसमें पुलिस मुर्गों या पंरिदो का केस डायरी में जिक्र करती है.

करोड़ों की कीमत के घर को मात्र 170 रूपये में बेच रहा है यह कपल, जानिए क्या है पूरा मामला

First published: 31 July 2020, 18:30 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी