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तमिलनाडु का यह गांव 35 दिन तक रहा अंधेरे में, ताकि घोंसले में जिंदा रहे चिड़िया के बच्चे

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 July 2020, 20:03 IST

तमिलनाडु का एक गाँव लगभग 35 दिनों से अंधेरे में है. इसके पीछे का कारण सामान्य तौर पर बिजली कटना या फिर बिजली का ट्रांसफार्मर फूंकाना नहीं है, जो देश के किसी गांव में होता है और जिसके कारण कई कई महीनों तक गांव अंधेरे में डूबे हुए होते हैं. इसके पीछे एक बहुत ही नेक काम है, जिसे जानने के बाद आप इन गांव वालों की तारीफ करेंगे.

राज्य के शिवगंगा जिले में स्थित इस गांव की स्ट्रीट लाइट्स एक महीने से अधिक समय से बंद हैं. एक भारतीय रॉबिन ने गाँव के मुख्य स्विचबोर्ड पर अपने अंडे दिए थे. इसके बाद गांव के लोगों ने इस चिड़ियां और उसके बच्चों को बचाने के लिए 35 दिनों तक अंधेरे में रहने का फैसला लिया.


टाइम्स ऑफ इंडिया कि रिपोर्ट के अनुसार, गांव की स्ट्रीट लाइट्स को बंद करने का विचार 20 वर्षीय कॉलेज के छात्र ए करुप्पुर्जा के दिमाग में आया था. गांव का सामान्य स्विचबोर्ड उनके घर के पास है और उन्होंने देखा था कि एक पक्षी ने वहाँ घोंसला बनाया लिया. खबर के अनुसार, ए करुप्पुर्जा ने कहा,"जब लॉकडाउन शुरू हुआ, तो मैंने एक पक्षी को फूस और पत्तियों से बॉक्स को भरते देखा. जब मैंने इसके अंदर देखा तो इसमें तीन छोटे हरे-नीले अंडे जिन पर धब्बों बने हुए थे, दिखाई दिए."

इसके तुरंत बाद, करुप्पुराजा ने अपने गांव के लोगों को इसमें शामिल करने का फैसला किया. एक सामान्य व्हाट्सएप ग्रुप पर, उसने पक्षियों के बारे में लोगों को बताया. इसके बाद इस ग्रुप के सभी सदस्यों ने यह सुनिश्चित करने में मदद करने का फैसला किया कि चिड़िया शांति से अपने अंडे सेज सके.

इसके बाद इन लोगों ने गांव के बाकी लोगों को इसके लिए राजी किया कि वो 35 दिनों तक अंधेरे में रहे ताकि चिड़िया को कोई दिक्कत ना हो. कुल 100 लोग थे और गांव पंचायत की अध्यक्ष एच कालीश्वरी भी इस मुहिम का हिस्सा बनी. हालांकि, कुछ गांव वालों ने इसका विरोध जरूर किया था लेकिन बाद में गांव के दूसरे लोगों ने उन्हें भी इस नेक काम के लिए राजी कर लिया.

वहीं गांव के दो सदस्यों ने बताया कि वो हर दिन इस चिड़िया के बच्चो को देखने आते थे, और धीरे धीरे उसके बच्चे बड़े हुए और उनके पंख आए, वहीं जब उनके पंख आए और वो जब वहां से उड़ गए, तो स्विचबोर्ड को साफ किया गया और फिर गांव में बिजली आई.

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First published: 25 July 2020, 20:03 IST
 
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