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Coronavirus: हैदराबाद में सीवेज जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा, हर रोज 2.6 लाख लोग छोड़ रहे कोरोना

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 August 2020, 13:24 IST

हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (IICT) के एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि हैदराबाद की कुल आबादी का लगभग 6.6 प्रतिशत लोग, यानि करीब 6.6 लाख लोग बीते 35 दिनों में कोरोना वायरस के संक्रमित हुए हैं और वर्तमान में शहर में लगभग 2.6 लाख लोग ऐसे हैं जो कोरोना वायरस के संक्रमित है.

दरअसल, एक टीम ने शहर के विभिन्न सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स में एकत्रित सीवेज नमूनों का परीक्षण किया ताकि पता चल सके कि शहर में कोरोना वायरस कितना प्रभावी है. सीवेज से कोरोना का सैंपल कलेक्ट करना खतरनाक नहीं होता है, क्योंकि यहां से किसी व्यक्ति के कोरोना संक्रमित होने का खतरा कम होता है. इस सीवेज जांच में शामिल होने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि किस इलाके में कोरोना का संक्रमण कितना फैला है इसके लिए सीवेज जांच काफी प्रभावी है.


इसके बारे में CCMB के निदेशक डॉ राकेश मिश्रा ने बताया,"हमारी खोज स्पष्ट रूप से साबित करती है कि प्रभावित व्यक्तियों का एक बड़ा हिस्सा एसिम्प्टोमैटिक है और उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं है. यह इस अवलोकन के साथ भी है कि अस्पताल में भर्ती या मृत्यु दर एक समय में इतने बड़े संक्रमण दर के साथ अपेक्षा से कम है. यह बताता है कि हमारी स्वास्थ्य प्रणाली महामारी के दौरान स्थिति को अच्छी तरह से संभालने में सक्षम क्यों है."

उन्होंने कहा,"अगर शहर में हॉटस्पॉट की पहचान करने और संक्रमण दर की गतिशीलता की निगरानी करने के लिए नागरिक निकायों के साथ समन्वय में किया जाता है तो ऐसे अध्ययन आवश्यक उपाय करने में सिस्टम की सहायता कर सकते हैं."

CCMB ने बुधवार को एक मीडिया विज्ञप्ति में कहा कि COVID -19 से संक्रमित होने वाले व्यक्ति न केवल नाक और मुंह के माध्यम से बल्कि मल के माध्यम से भी वायरस को बहाते हैं. इससे किसी इलाके या क्षेत्र में संक्रमण के प्रसार का अनुमान लगाने के लिए सीवेज नमूनों के उपयोग से काफी मदद मिलती है. इसके अलावा, मल में वायरस के नमूने गैर-संक्रामक हैं, जिससे अध्ययन का संचालन करना आसान हो जाता है.

अध्ययन के अनुसार, एक संक्रमित व्यक्ति 35 दिनों तक मल के नमूनों में वायरल सामग्री को बहा सकता है, मल के नमूनों पर किए गए अध्ययन से उन लोगों की संख्या का अंदाजा होता है जो एक महीने से भी कम समय में संक्रमित हो गए होंगे. CCMB और IICT के शोधकर्ताओं ने ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम में एसटीपी के लगभग 80 प्रतिशत हिस्से को कवर किया और शहर में संभावित संक्रमित व्यक्तियों की संख्या का अनुमान लगाने के लिए सीवेज के नमूनों की जांच की.

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First published: 20 August 2020, 10:02 IST
 
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