Home » अजब गजब » An area of ​​this country has been deserted for 100 years, there is a ban on the departure of animals not only humans
 

100 साल से वीरान पड़ा है इस देश का एक इलाका, इंसान ही नहीं जानवरों के जाने पर भी है पाबंदी

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 September 2021, 15:00 IST

पूरी दुनिया में फैले कोरोना वायरस ने हाहाकार मचा दिया. जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पिछले साल ही महामारी घोषित किया था. ये कोई पहली बार नहीं है जब धरती पर इस तरह की बीमारी पैदा हुई है. इससे पहले भी कई बार ऐसी बीमारियां पैदा हुईं जिन्होंने सैकड़ों लोगों की जान ले ली. फ्रांस में एक गांव ऐसा है जो पिछले सौ साल से बीरान पड़ा है. इस गांव में इंसानों के साथ-साथ जानवरों के जाने पर भी पाबंदी है. इस गांव का नाम है 'जोन रोग'. जोन रोग फ्रांस के उत्तर-पूर्वी इलाके में स्थित है. पिछले 100 सालों से इस इलाके को फ्रांस के बाकी क्षेत्रों से काटकर रखा गया है.

जिससे यहां कोई आ जो न सके. इतना ही नहीं, इस इलाके में जगह-जगह 'डेंजर जोन' के बोर्ड भी लगे हुए हैं, जो यह दर्शाते हैं कि यहां आना अपनी जान को जोखिम में डालना है. दरअसल, फ्रांस के इस इलाके को 'रेड जोन' के नाम से जाना जाता है. प्रथम विश्व युद्ध से पहले यहां कुल नौ गांव थे, जहां लोग रहा करते थे और खेती करके अपना गुजारा करते थे. लेकिन विश्व युद्ध में यहां इतने गोला-बारूद और बम गिरे कि पूरा का पूरा इलाका बर्बाद हो गया. यहां लाशों के ढेर लग गए और भारी मात्रा में केमिकल युक्त युद्ध सामग्री पूरे इलाके में फैल गई.


बताया जाता है कि इस इलाके में जमीन ही नहीं बल्कि पानी भी जहरीला हो गया है. इस पानी को साफ करना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन है. इन्हीं कारणों से फ्रांस की सरकार ने इसे 'जोन रोग' या 'रेड जोन' घोषित कर दिया और इंसानों से लेकर जानवरों तक के यहां आने पर पाबंदी लगा दी. साल 2004 में कुछ शोधकर्ताओं ने 'जोन रोग' की मिट्टी और पानी का परीक्षण किया. जिसमें भारी मात्रा में आर्सेनिक पाया गया.

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आर्सेनिक एक जहरीला पदार्थ है, जिसकी एक छोटी सी मात्रा ही अगर गलती से भी इंसान के मुंह में चला जाए तो कुछ ही घंटों में उसकी मौत हो जाती है. हालांकि कुछ लोग इस जगह को भुतहा भी मानते हैं. उनका मानना है कि पहले विश्व युद्ध के दौरान मारे गए लोगों के आत्माएं यहां भटकती रहती हैं. हालांकि, उस समय के नौ गांव, जो युद्ध में बर्बाद हो गए, उनमें से दो गांवों का आंशिक रूप से पुनर्निमाण चल रहा है, जबकि बाकी के छह गांव अभी भी वीरान हैं.

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First published: 6 September 2021, 15:00 IST
 
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