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इस रहस्यमयी गुफा में छिपा है सदियों पुराना अकूत खजाना, यहां जाने वाला कभी नहीं लौटा वापस

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 November 2021, 10:59 IST

पूरी दुनिया असंख्य रहस्यों से भरी पड़ी है. इंसान तो क्या वैज्ञानिक भी सभी रहस्यों से पर्दा नहीं उठा पाए. आज हम आपको एक ऐसी गुफा के बारे में बताने जा रहे हैं जहां लाखों साल पुराना अकूत खजाना छिपा हुआ है. इस गुफा के रहस्य को जानने के लिए जिसने में इसमें जाने की कोशिश की वह कभी जिंदा वापस नहीं लौट सका. दरअसल, हम बात कर रहे हैं दक्षिण अमेरिकी देश मेक्सिको की. जहां एक गुफा में लाखों साल पुराना खजाना छिपे होने की बात कही जाती है. बता दें कि इस जगह पर विशाल आकार के कई क्रिस्टल मौजूद हैं. ये क्रिस्टल किसी खजाने से कम नहीं हैं, लेकिन ऐसा माना जाता है कि इस जगह पर जाना मौत के मुंह में जाने जैसा ही होता है.

बता दें कि मेक्सिको में स्थित रहस्यमयी गुफा है जिसका नाम जायंट क्रिस्टल केव है. यहां एक पहाड़ के करीब 984 फीट नीचे गुफा में क्रिस्टल के विशाल पिलर यानी खंबे के मौजूद हैं, जो बेहद कीमती हैं. बता दें कि साल 2000 में इनके बारे में जब वैज्ञानिकों को पता चला तो वो हैरान रह गए, क्योंकि खुदाई के दौरान पहाड़ के इतनी नीचे ये अद्भुत नजारा देखने को मिला था. वैज्ञानिकों के मुताबिक ये क्रिस्टल जिप्सम से बने हुए हैं जो एक प्रकार का खनिज होता है. इसे  पेपर और टेक्सटाइल इंडस्ट्री में फिलर की तरह इस्तेमाल करते हैं. साथ ही इमारतें बनाने के लिए सीमेंट में भी इस्तेमाल किया जाता है.


बताया जाता है कि इस गुफा में मौजूद क्रिस्टल से बने ये खंबे 5 लाख साल से भी ज्यादा पुराने हैं. साइंस की एक वेबसाइट के मुताबिक इस जगह पर अब जाना नामुमकिन है, क्योंकि यहां का तापमान बहुत अधिक है. एक समय जब ये जगह इंसानों के जाने के लिए खुली थी तब उस दौरान कई मौतें भी हुई थीं. वहीं एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन क्रिस्टल के नीचे बहुत गरम मैगमा पाया जाता था और करीब 2 करोड़ से भी ज्यादा साल पहले ये मैगमा दरारों से धीरे-धीरे बाहर आना शुरू हो गया था. इस मैगमा के बाहर आने से ही पहाड़ का निर्माण हुआ. इसी मैगमा के जरिए क्रिस्टल भी बनते गए.

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वैज्ञानिकों का मानना है कि जब मैगमा बाहर निकला तो गुफा में पानी भी मौजूद था. इस पानी में एनहाईड्राइट खनिज था. वहीं गुफा का तापमान 58 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा था. इतने तापमान में एनहाईड्राइट अपने असली रूप में रहता है, लेकिन जैसे ही तापमान 58 से कम हुआ होगा, इसने क्रिस्टल का आकार लेना शुरू कर दिया होगा. एक तो तापमान इतना ज्यादा और दूसरा हवा में नमी 100 फीसदी बनी रहती है, जिसके कारण लोग डिहाईड्रेशन से मर जाते हैं. इसलिए इस गुफा को मौत की गुफा भी कहा जाता है. यहां जाने के नाम पर ही लोग थर-थर कांपने लगते हैं.

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First published: 24 November 2021, 10:59 IST
 
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