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इस कुंड को माना जाता है रहस्यमयी, जिसके पानी की तीन बूंद पीने से ही बुझ जाती है प्यास

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 November 2021, 12:58 IST

हमारे देश में हजारों प्राचीन मंदिर मौजूद हैं इनमें से कुछ मंदिरों को रहस्यमयी माना जाता है. इसके साथ ही तमाम ऐसे कुंड में भी मौजूद हैं जिनके बारे में रहस्यमयी कहानिया प्रचलित हैं. आज हम आपको एक ऐसे ही कुंड के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके पानी के श्रोत के बारे में कोई नहीं जान पाया. यही नहीं इस कुंड का पानी इतना चमत्कारिक है कि इसके पानी की तीन बूंद पीने से ही प्यास बुझ जाती है. दरअसल, मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में एक कुंड मौजूद है जिसका नाम भीमकुंड है. इस कुंड के बारे में कहा जाता है कि महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांडव यहां से जा रहे थे. तभी द्रोपदी को प्यास लगी. उसके बाद पांडव आस-पास पानी खोजने लगे. लेकिन जब कहीं पानी नहीं मिला.

तब धर्मराज युधिष्ठिर ने नकुल को याद दिलाया कि उनके पास इतनी शक्ति है कि वह पाताल की गहराई में स्थित पानी की खोज कर सकते हैं. इसके बाद नकुल ने ध्यान लगाया. जिससे उन्हें पता चल गया कि पानी कहां है. लेकिन पानी कैसे मिले यह परेशानी खत्म नहीं हुई. प्राचीन कथा के मुताबिक, द्रोपदी को प्यास से तड़पता देख भीम ने अपनी गदा से पानी वाले स्थान पर वार कर दिया. गदा के प्रहार से जमीन में कई छेद हो गए जिसमें से पानी निकलने लगा. भूमि की सतह से जल स्रोत करीब तीस फीट नीचे था. फिर युधिष्ठिर ने अर्जुन से कहा कि वह अपनी धनुर्विद्या का कौशल दिखाएं और जल तक पहुंचने का रास्ता बनाएं.


इसके बाद अर्जुन ने अपने बाणों से जल स्रोत तक सीढ़ियां बना दीं. इन्हीं सीढ़ियों से द्रौपदी जल स्रोत तक पहुंच गईं और पानी पीकर वापस आ गईं. यह कुंड भीम की गदा से बना इसलिए इसे भीमकुंड के नाम से जाना जाने लगा. वहीं दूसरी मान्यता यह है कि भीमकुंड एक शांत ज्वालामुखी है. कई भू-वैज्ञानिकों ने इसकी गहराई मापने की कोशिश की, लेकिन कुंड के तल का पता नहीं चल पाया. बताया जाता है कि कुंड की अस्सी फिट की गहराई में तेज जलधाराएं प्रवाहित होती हैं.

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यह धाराएं शायद इसको समुद्र से जोड़ती हैं. भू-वैज्ञानिकों के लिए भी भीमकुंड की गहराई आज भी रहस्य बनी हुई है. ऐसी मान्यता है कि भीमकुंड में स्नान करने से त्वचा संबंधी बीमारियां भी ठीक हो जाती हैं. अगर कोई कितना भी प्यासा हो इस कुंड की तीन बूंदों से उसकी प्यास बुझ जाती है. ऐसा कहा जाता है कि अगर देश के ऊपर कोई बड़ा सकट आने वाला होता है, तो इस जलकुंड का जलस्तर बढ़ने लगता है आम दिनों में इसका जलस्तर सामान्य रहता है.

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First published: 13 November 2021, 12:58 IST
 
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