Home » अजब गजब » Nandanpur Village in Bundelkhand: where locks are not installed in houses, people here never fight among themselves
 

ये है दुनिया का अनोखा गांव जहां घरों में नहीं लगाए जाते ताले, आपस में कभी नहीं लड़ते यहां के लोग

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 November 2021, 15:57 IST

यह बात आपको कुछ अचरज में डाल सकती है कि बुंदेलखंड के टीकमगढ़ जिले में नंदनपुर (गोरएक ऐसा गांव हैजहां न तो पुलिस की जरूरत है और न ही यहां चोरों का खौफ हैयही कारण है कि इस गांव के लोग बाहर जाने पर भी घरों में ताले लगाना जरूरी नहीं समझतेटीकमगढ़ जिले के मोहनगढ़ थाने के अंतर्गत आता है नंदनपुर (गोर). यादव बाहुल्य इस गांव में लगभग 50 घर हैं और आबादी लगभग 300 हैयहां के हर घर में बोरवेल हैलोगों ने रिचार्ज तकनीक को अपना रखा है जिससे जल संकट नहीं हैफसलों की पैदावार ठीक है और आपसी सामंजस्य भी हैयहां पर शराबबंदी और मांस बंदी पूरी तरह है.

इस गांव को कई वर्षो से किसी भी तरह की पुलिस सहायता की जरूरत नहीं पड़ी. इस गांव में रहने वाले भागीरथी यादव बताते हैं, "पूर्वजों से सुना और उन्होंने स्वयं खुद देखा है कि उनके गांव में कभी झगड़ा नहीं हुआ अगर छोटा-मोटा झगड़ा हो भी जाता है तो उसे गांव के लोग आपस में निपटा लेते हैं और गांव में कोई भी शराब नहीं पीता हैइतना ही नहीं यहां मुर्गी-मुर्गा पालने से लेकर अंडा तक का उपयोग नहीं होता है."


वह कहते हैं, "समस्या की सबसे बड़ी जड़ शराब हैपीढ़ियों से चली आ रही परंपरा के कारण ही वर्तमान दौर में भी कोई शराब नहीं पीतामांस का सेवन भी नहीं करतासभी का जोर खेती पर हैबुंदेलखंड सूखा ग्रस्त हैमगर यहां पानी की ज्यादा तंगी नहीं हैफसलों की खेती भी आसानी से हो रही है क्योंकि गांव के लोगों ने रिचार्ज करने की तकनीक को अपनाया है." गांव की बुजुर्ग विमला देवी कहती हैं कि उनके गांव में शराबमांस आदि का उपयोग न होने के कारण शांति का माहौल रहता हैमहिलाओं को किसी बात की दिक्कत नहीं होतीयहां न तो छेड़छाड़ की घटनाएं होती हैं और न ही मारपीट कीआसपास के गांव में भले ऐसा होता रहे मगर उन्होंने अपने जीवन में ऐसा नहीं देखा.

उन्होंने कहा है कि यह गांव ऐसा है जहां पुलिस बुलाने की जरूरत नहीं होती हैलोग जब घर से बाहर जाते हैं तो ताला तक लगाना जरूरी नहीं समझते क्योंकि यहां कोई बदमाश प्रवृत्ति का है ही नहीं इसलिए चोरी का कोई डर नहींमोहनगढ़ थाने के प्रभारी ने का कहना है कि, "मेरी अभी हाल ही में यहां पदस्थापना हुई हैमगर यह बात सही है कि नंदनपुर में विवाद कम होते हैंअब से दो साल पहले 2016 में यहां केवल एक झगड़े का मामला सामने आया था."

गांव के हरी सिंह कहते है, "पूर्वजों से मिले संस्कारों का असर हर वर्ग पर हैयहां लोग नियमित रुप से रामायण पढ़ते हैंपढ़ाई पर भी ध्यान दिया जाता हैआपसी भाईचारा कायम हैयहां न तो चोरी होती है और न ही आज तक डकैती हुईस्थिति यह है कि लोग दूसरे को बताकर अपने घर में बगैर ताले लगाए चले जाते हैं."

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चंदन सिंह के अनुसारइस गांव में आपसी भाईचारा हैखेती में आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाता हैयहां परमार्थ समाजसेवी संस्थान के विषेषज्ञ जैविक खेती के लिए प्रशिक्षित करते हैं और किसान उसी के आधार पर खेती करते हैं जिससे गांव में खुशहाली आएबुंदेलखंड की पहचान कभी डकैत प्रभावित इलाके के तौर पर रही हैअब डकैत तो नहीं हैं मगर अपराधों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा हैमहिला अत्याचार के मामले में भी इलाका चर्चाओं में रहता है मगर नंदनपुर जैसे गांव वीराने में खुशहाली का सुखद संदेश देते नजर आते हैं.

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First published: 16 November 2021, 15:57 IST
 
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