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इस गुफा में छिपा है दुनिया के समाप्त होने का राज, जानिए इस रहस्यमयी स्थान की पूरी सच्चा

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 November 2021, 15:26 IST

गुफाओं का नाम सुनते ही हमें किसी रहस्यमयी स्थान की याद आ जाती है. क्योंकि दुनिया में ज्यादातर गुफाएं किसी न किसी रहस्य से जुड़ी हुई है. आज हम आपको एक ऐसी ही रहस्यमयी गुफा के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में कहा जाता है कि इस गुफा में ही दुनिया के समाप्त होने का राज छिपा हुआ है. असलियत क्या है ये कोई नहीं जानता. ये गुफा उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित है. इस गुफा का नाम है पाताल भुवनेश्वर गुफा मंदिर. बता दें कि इस गुफा का जिक्र पुराणों में मिलता है. ऐसा माना जाता है कि इस गुफा के गर्भ में दुनिया के समाप्त होने का रहस्य छिपा हुआ है. इस गुफा की समुद्र तल से गहराई 90 फीट नीचे हैं. इस गुफा में एक बेहद सुंदर मंदिर भी है जिसे बहुत ही रहस्यमयी माना जाता है. इस मंदिर के अंदर जाने के लिए बेहद ही पतले रास्ते हैं.

ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर की खोज सूर्य वंश के राजा ने की थी. सूर्य वंश के राजा ऋतुपर्णा का त्रेता युग में अयोध्या पर शासन था. राजा ऋतुपर्णा की यहीं पर नागों के राजा अधिशेष से मुलाकात हुई थी. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस मंदिर की खोज करने वाले राजा ऋतुपर्णा पहले इंसान थे. कहा जाता है कि इस गुफा के अंदर राजा ऋतुपर्णा को नागों के राजा अधिशेष लेकर गए थे. इसी स्थान पर ऋतुपर्णा को भगवान शिव और अन्य देवी देवताओं के दर्शन प्राप्त हुए. फिर इस गुफा की कोई चर्चा नहीं की गई. इसके बाद द्वापर युग में पांडवों ने इस गुफा को खोज निकाला. इस गुफा में पांडव भगवान की पूजा करते थे. स्कंदपुराण में कहा गया है कि पाताल भुवनेश्वर में भगवान शिव निवास करते हैं जहां सभी देवी देवता उनकी पूजा करने के लिए आते हैं.


पौराणिक कथाओं के अनुसार, उसके बाद जगदगुरु आदि शंकराचार्य ने कलयुग में इस गुफा की खोज की थी और यहां पर शिवलिंग स्थापित किया. ये शिवलिंग तांबे का था. बताया जाता है कि नागों के राजा अधिशेष ने अपने सिर पर पृथ्वी का भार उठाया हुआ है. इस मंदिर में रणद्वार, पापद्वार, धर्मद्वार और मोक्षद्वार के नाम के चार दरवाजे मौजूद हैं. पौराणिक कथाओं के मुताबिक, जब रावण की मौत हुई थी, तो पापद्वार बंद हो गया था. फिर महाभारत का युद्ध समाप्त होने के बाद रणद्वार भी बंद हो गया.

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ऐसी भी मान्यता है कि इस मंदिर में भगवान गणेश का कटा सिर स्थापित है और यहां पर भगवान गणेश को आदिगणेश कहा जाता है. इस मंदिर में चार खंभे हैं जो सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग का प्रतीक हैं. इनमें कलियुग के खंभे की लंबाई सबसे अधिक है. ऐसा माना जाता है कि इस गुफा में स्थित एक शिवलिंग लगातार बढ़ता जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, जब यह शिवलिंग गुफा की छत को छू देगा, तो दुनिया समाप्त हो जाएगी. कहा जाता है कि इस गुफा में स्थित पत्थर से जानकारी मिल सकती है कि दुनिया कब समाप्त होने वाली है.

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First published: 13 November 2021, 15:26 IST
 
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