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भारत में यहां हुई थी लाल रंग की खूनी बारिश, आज भी अनसुलझा है इसका रहस्य

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 October 2021, 12:55 IST

केरल से लेकर उत्तर भारत तक एक बार फिर से बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. दक्षिण भारतीय राज्य केरल में तो इतनी बारिश हुई कि कई नदियां उभनने लगी और कई मकान ढह गए. इस घटना में कई लोगों की मौत भी हो गई. आज हम आपको एक ऐसी बारिश के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में आपने आज तक नहीं सुना होगा. ये बारिश पानी की नहीं बल्कि खून की थी. आज से बीस साल पहले यानी 25 जुलाई 2001 को केरल के इडुक्की और कोट्टयम में आसमान से अचानक खून की बारिश होने लगी. स्थानीय लोग अपने चारों ओर खून डर गए. लोग सोच में पड़ गए कि आसमान से गिरने वाला खून किसका है जो आकाश से ऐसे लगातार बरस रहा है.

जिसने भी लाल रंग की इस बारिश को देखा वह हैरान था. किसी की कुछ समझ में नहीं आ रहा था. लाल रंग की ये बारिश लगातार होती ही जा रही थी. सैकड़ों लोग इस अद्भुत और रहस्यमयी बारिश के गवाह बने. इन्हीं में से कोट्टयम की रहने वाली रेखा मंगलम थीं. रेखा ने तब बताया था कि, वह उस दिन अपने घर की छत पर कपड़े सुखाने के लिए डालने गई थी, अचानक लाल रंग की कुछ बूंदे उनके कपड़ों पर गिरीं. ऐसा लग रहा कि वह रक्त की बूंदे हैं. रेखा मंगलम हैरान थीं कि यह खून के निशान कहां से आ गए? वह जब तक कुछ और सोच पाती कि आसमान से खून की मोटी-मोटी बूंदें गिरने लगीं.


उन्हें ऐसा लगा की धरती का अंत आ गया है. क्योंकि ऐसा लग रहा था कि कोई आसमानी आफत पृथ्वी के ऊपर मंडरा रही हो, जिसके कारण यह लाल रंग के खून की तरह बारिश हो रही थी. वह चीखते-चिल्लाते हुए छत से नीचे उतर आईं. तब तक उस बारिश ने विकराल रूप ले लिया था. रेखा मंगलम ने बताया था कि मेरे मकान के चारों ओर सामान्य बारिश की तरह वर्षा हो रही थी. बस फर्क यह था कि बरसने वाला द्रव पानी नहीं बल्कि खून की बूंदे थी. ऐसा लग रहा था कि पृथ्वी के ऊपर आसमान में किसी का कत्ल कर दिया गया हो.

25 जुलाई 2001 के दिन केरल का कोट्टयम और इडुक्की की जमीन खून से भर गई. उस दिन जगह-जगह पर तालाब नदी नाले सभी लाल रंग के हो गए थे. हर तरफ पानी की जगह खून की नदियां बह रही थी. केरल की कोट्टयम और इडुक्की के निवासियों को ऐसा लग रहा था जैसे की वह किसी युद्ध भूमि में रह रहे हों. केरल में हुई इस बारिश का रहस्य आज तक अनसुलझा है. इस संबंध में अनेकों शोध कार्य किए गए गए, लेकिन वैज्ञानिक किसी निश्चित नतीजे पर नहीं पहुंच सके. कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि आसमान में उल्का पिंड के फटने के कारण लाल रंग की बारिश हुई तो कुछ वैज्ञानिक एक प्रकार के शैवाल को रेड रेन का कारण मानते हैं.

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वहीं ज्योतिष के जानकार लाल रंग की इस बारिश को ग्रहों की असामान्य दशा में होने का कारण बताते हैं. साथ ही कुछ ज्योतिषियों का यह भी कहना था कि यह खूनी बारिश, आने वाले कुछ वर्षों में पृथ्वी पर कुछ मानव सभ्यताओं के अंत होने का संकेत दे रही है. सच कुछ भी हो लेकिन यह वह रहस्य आज भी बरकरार है. बताया जाता है कि हमारे देश में लाल रंग की बारिश के अलावा कई स्थानों पर पीले और हरे रंग की बारिश भी हो चुकी है.

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First published: 18 October 2021, 12:55 IST
 
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