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कई महीनों तक अंधेरे में रहने वाले इस गांव के लिए मसीहा बन गया एक इंजीनियर, सूरज बनाकर दी रोशनी

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 November 2021, 12:57 IST

जहां सूरज की रोशन न पहुंचे वहां इंसान ज्यादा दिनों तक नहीं रह सकता. लेकिन इंसान  हमेशा अपनी जरूरतों के मुताबिक चीजों को ढाल लेता है. आज हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जहां सूरज की रोशनी कई महीनों के लिए गायब हो जाती थी, लेकिन एक इंजीनियर इस गांव के लिए मसीहा बन गया और गांव में एक सूरज बना कर लगा दिया. जुगाड़ से बनाए गए इस सूरज से अब ये गांव साल के बारहों महीने रोशन रहता है. दरअसल, इटली में विगल्लेना नाम का एक गांव है जो ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों के बीच तलहटी में बसा हुआ है.

पहाड़ों की वजह से इस गांव में सूरज की रोशनी नहीं आ पाती थी. इटली के मिलान शहर के उत्तर में बसा ये गांव यहां से से करीब 130 किलोमीटर दूर घाटी में बसा है. इस गांव में सिर्फ 200 लोग रहते हैं. यहां पर नवंबर से फरवरी तक सूरज की रोशनी नहीं पहुंच पाती. क्योंकि पहाड़ों की वजह से ये रोशनी गांव तक नहीं पहुंच पाती थी. लोगों की समस्या को देखकर गांव के एक आर्किटेक्ट और इंजीनियर ने एक रास्ता खोज निकाला. इंजीनियर ने गांव के मेयर की मदद से विगल्लेना गांव के लिए एक आर्टिफीशियल सूरज बना दिया.


बता दें कि ये गांव साल के तीन महीने तक अंधेरे में डूबा रहता था लेकिन अब यहां सूरज की रोशनी पहुंचती है. सूरज की रोशनी न पहुंचने की वजह से इस गांव के लोग बेहद परेशान थे. उन्हें तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता था. इस समस्या का समाधान गांव के ही एक आर्किटेक्ट और इंजीनियर ने निकाला और एक आर्टीफिशियल सूरज बना डाला. दरअसल, साल 2006 में इंजीनियर ने गांव के मेयर की मदद से पहाड़ों की चोटी पर 40 वर्ग किलोमीटर का एक शीशा लगवा दिया.

शीशे को इस तरह लगाया गया कि उस पर पड़ने वाली सूर्य की रोशनी रिफलेक्ट होकर सीधे गांव पर गिरे. पहाड़ की चोटी पर लगाया गया ये शीशा अब दिन में 6 घंटे के लिए गांव को रोशन करता है. शीशे का वजह करीब 1.1 टन है और इसमें 1 लाख यूरो का खर्च आया. इस कारीगरी में तकनीक की भी मदद ली गई है, पहाड़ पर लगाए गए शीशों को कंप्यूटर द्वारा कंट्रोल किया जाता है.

अपना खुद का सूरज बनाने के बाद विगल्लेना गांव दुनियाभर में चर्चा का केंद्र बन गया. उसके बाद इस गांव में तमाम पर्यटक पहुंचने लगे कि आखिर इस गांव ने अपना खुद का सूरज कैसा बनाया है. विगल्लेना गांव के मेयर पियरफ्रेंको मडाली का कहना है कि इस आर्टीफिशियल सूरज का आइडिया किसी वैज्ञानिक का नहीं बल्कि एक आम इंसान का है.

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यह आइडिया तब सामने आया जब सर्दियों के मौसम में लोग धूप ना मिलने की वजह से घरों में ही रहा करने लगे. शहर ठंड और अंधेरे की वजह से बंद हो जाता था. इसके बाद करीब 87 लाख रुपये की लागत से एक आर्टीफिशियल सूरज को तैयार किया गया. अब सर्दियों के मौसम में भी गांव में सूरज की रोशनी पहुंचती है.

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First published: 6 November 2021, 12:57 IST
 
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