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Raksha Bandhan 2021: 474 सालों बाद बना है दुर्लभ संयोग, जानिए क्यों मनाई जाती है राखी

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 August 2021, 12:51 IST
rakshabandhan (catch news)

Raksha Bandhan 2021: रक्षाबंधन (Rakshabandhan) का त्योहार आज पूरे देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है. आज के दिन बहन अपने भाई के कलाई में राखी बांधती हैं, जबकि भाई अपनी बहन की रक्षा के लिए वचन देते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को आज राखी की बधाई दी है. इस बार राखी के मौके पर 474 सालों बाद दुर्लभ संयोग बना है. 

बता दें कि राखी बांधने के लिए शुभ मूर्हूत का होना बहुत जरूरी है. रक्षाबंधन पर राखी बांधकर बहनें अपने भाई की लंबी उम्र की कामना करती हैं. इस प्रेम के बदले भाई भी अपनी बहन को उपहार भेंट कर उनकी आजीवन रक्षा करने का संकल्प लेते हैं. ज्योतिर्विद कहते हैं कि राखी बांधने के लिए हमेशा शुभ मुहूर्त का चयन करना चाहिए. 

भद्रा के समय कभी भी राखी नहीं बांधनी चाहिए. मान्यता है कि भद्रा के समय राखी बांधने से भाई का सबकुछ बर्बाद होने लगता है. दरअसल, रावण की बहन ने भद्रा काल में ही उसे राखी बांधी थी, इस वजह से उसका विनाश हो गया था. अच्छी बात यह है कि इस बार रक्षा बंधन के पर्व पर भद्रा का साया नहीं है. इस कारण बहनें पूरे दिन भाइयों की कलाइयां सजा सकेंगी.

ज्योतिष के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन इस साल श्रावण पूर्णिमा, धनिष्ठा नक्षत्र के साथ शोभन योग का संयोग बन रहा है. इस संयोग को बहुत ही उत्तम माना गया है. रक्षाबंधन के दिन तीन-तीन खास संयोग भाई-बहन के लिए लाभकारी होंगे. राखी को रक्षा सूत्र भी कहते हैं. रक्षा सूत्र के बारे में शास्त्रों में गहराई से बताया गया है. 

महाभारत के अनुसार, जब युद्ध शुरु हुआ था तो युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर सभी सैनिकों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था. देवासुर संग्राम में भी देवराज इंद्र ने इसे धारण कर असुरों का संहार किया था. 

इसलिए मनाई जाती है राखी

मान्यता है कि राजा बलि ने भगवान विष्णु को भक्ति के बल पर जीत लिया था. उन्होंने उनसे वरदान मांगा था कि वह अब मेरे ही राज्य में रहेंगे. इस पर भगवान मान गए और उन्हीं के राज्य में रहने लगे. जब वह वापस नहीं गए तो माता लक्ष्मी दु:खी रहने लगीं. इसके बाद नारद के परामर्श पर वह पाताल लोक गईं और बलि के हाथ पर रखी बांध उन्हें भाई बनाकर बलि से निवेदन किया और विष्णु भगवान को वापस वैकुंठ धाम ले आईं. इसके बाद से ही रक्षा बंधन की परंपरा चल रही है.

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First published: 22 August 2021, 12:51 IST
 
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