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Weather Update: फिर बदला मौसम का मिजाज, आज देश के कई राज्यों में बारिश के आसार

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 October 2021, 7:57 IST

Weather Forecast: देश के अलग-अलग इलाकों में आज से एक बार फिर मानसून सक्रिय होने जा रहा है. जिसके चलते देशभर में भिन्न-भिन्न राज्यों में बारिश होने की संभावना है. मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिमी मानसून की वापसी की शुरुआत के लिए बुधवार से परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं. आईएमडी के राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र के वरिष्ठ अधिकारी आर के जेनामणि के मुताबिक, साल 1960 के बाद से दक्षिण-पश्चिमी मानसून की दूसरी सबसे देरी से वापसी है. इसके साथ ही साल 2019 में उत्तर-पश्चिम भारत से मानसून की वापसी नौ अक्टूबर को शुरू हुई थी. उत्तर-पश्चिम भारत से दक्षिण-पश्चिमी मानसून की वापसी आमतौर पर 17 सितंबर से शुरू हो जाती है.

उत्तर प्रदेश के इन जिलों में बारिश की संभावना


लौटते मानसून का सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में देखने को मिलेगा. मौसम विभाग के मुताबिक, बुधवार की सुबह उत्‍तर प्रदेश के बहजोई, सहसवां, कासगंज, गंजडुंडवाड़ा, एटा, खुर्जा, गभाना समेत कई अन्‍य जगहों पर बारिश होने की पूरी संभावना है. मौसम विभाग के मुताबिक बुधवार को यूपी के अन्य हिस्‍सों में भी बारिश होने से इनकार नहीं किया जा सकता. इसके साथ ही स्‍काईमेट वेदर ने भी बुधवार को देश के कई राज्‍यों में बारिश का पूर्वानुमान लगाया है.

इन राज्यों के अधिकांश हिस्सों में बारिश का अनुमान

वहीं स्‍काईमेट वेदर के मुताबिक, आज यानी बुधवार को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और लक्षद्वीप के अधिकांश हिस्‍सों में बारिश होने के पूरे आसार हैं. इसके अलावा उत्‍तर पूर्वी राज्‍यों, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, मध्‍य प्रदेश, विदर्भ, मराठवाड़ा, मध्‍य महाराष्‍ट्र, तटीय कर्नाटक, छत्‍तीसगढ़, रायलसीमा और उत्‍तर प्रदेश के भी अधिकांश इलाकों में बुधवार को अच्‍छी बारिश हो सकती है.

स्‍काईमेट वेदर का पूर्वानुमान के मुताबिक, 9 अक्‍टूबर तक मुंबई और उसके आसपास के इलाकों और कोंकण क्षेत्र में हल्‍की से तेज बारिश हो सकती है. बता दें कि इस बार जून से सितंबर तक चार महीने के दौरान दक्षिण-पश्चिमी मानसून के मौसम में देश में ‘सामान्य’ बारिश हुई है. एक जून से 30 सितंबर तक अखिल भारतीय मानसूनी वर्षा 87 सेमी रही, जबकि 1961-2010 के दौरान लंबी अवधि का औसत (LPA) 88 सेमी है. यह लगातार तीसरा साल है जब देश में सामान्य या सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई. इससे पहले 2019 और 2020 में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई थी.

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बारिश से खराब हो सकती हैं फसलें

अक्टूबर का महीना आमतौर से धान की कटाई और मढ़ाई का महीना होता है. इसी महीने में उत्तर प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में मक्का और बाजरा की फसल की कटाई और मढ़ाई भी की जाती है. ऐसे में अगर बारिश का सिलसिला खत्म नहीं होता तो किसानों को परेशानी हो सकती है और फसल खराब होने की पूरी संभावना है. इसके साथ ही मटर, बाजरा और कुछ इलाकों में गेंहू, चना जैसी रवि की फसलों की बुवाई भी अक्टूबर में ही होती है. लगातार बारिश होने से इन फसलों की बुवाई में भी देरी हो सकती है.

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First published: 6 October 2021, 8:01 IST
 
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