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आपके बच्चे को आता है बहुत गुस्सा तो तुरंत अपनाएं ये टिप्स, वरना हो सकता है नुकसानदायक

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 November 2021, 12:56 IST
angry child (catch news)

Control Aggressive Behaviour in Child: जब बच्चे चिड़चिड़े हो जाते हैं तो हम कई बार इस बात की चिंता ही नहीं करते कि उनका ये गुस्सा किस वजह से है. मगर जब बच्चे चीजों को तोड़ना और फेंकना शुरु कर देते हैं तब हालात सामान्य नहीं रहते. इसके बाद उन्हें तुरंत किसी साइक्लॉटिस्ट (Psychologist) यानी मनोचिकित्सक की जरूरत होती है.

बच्चों में होने वाले ये बदलाव दो तरह से हो सकते हैं. पहला उनके अंदर हार्मोन का असामान्य बदलाव हो रहा होता है. दूसरा वह जिस परिवेश या स्थान पर रह रहा है वहां कुछ परेशानी है. यहां दो बातें आपको समझनी होंगी. पहली- अगर बच्चे का चिड़चिड़ापन परिवेश की वजह से बढ़ रहा है तो उसे आप खुद कंट्रोल करें. दूसरी- अगर बच्चे हार्मोन के बदलाव की वजह से गुस्से वाले हो रहे हैं तो उसे तुरंत ही किसी मनोचिकित्सक की आवश्यकता है. क्योंकि बच्चों में इस तरह की परेशानी आगे चलकर बहुत खतरनाक हो सकती है.

5 से 8 साल तक के बच्चों में चिड़चिड़ापन होने के तीन कारण होते हैं. पहला- उन्हें ऐसा लगता है कि उनसे ज्यादा उनके भाई-बहन को प्यार किया जा रहा. दूसरा- उनकी डिमांड को पूरा न करना या उनकी बार-बार पिटाई करना. तीसरा- आखिरी कारण गंभीर कारण हो सकता है. जिसमें बच्चें के साथ सेक्सुअल असाल्ट होना भी हो सकता है.

क्या कहते हैं मनोचिकित्सक?


मनोचिकित्सकों का मानना है कि 14 से 25 साल की उम्र के बच्चों में आमतौर में पेरेंट्स के बिहेव के कारण गुस्सा होता है. उन्हें बार बार टोकना, गलती पर खूब डांटना और सबके सामने बेइज्जत करना, उनकी आजादी में दखल, उनकी प्राइवेसी में दखल, उनके जॉब या करियर को लेकर ताना देना या हार्मोंस में बदलाव भी इसके कारण हो सकते हैं.

हॉर्मोन असंतुलन हो सकता है कारण

हॉर्मोन असंतुलन भी गुस्से और चिड़चिड़ेपन का बड़ा कारण हो सकता है. दरअसल, टीनएजर्स में बहुत हाई लेवल की एनर्जी होती है और वो जब इस एनर्जी को सही जगह इस्तेमाल नहीं कर पाते तो उनके अंदर धीरे-धीरे गुस्सा पनपना शुरु होता है. ग्रोइंग स्टेज होने के कारण हार्मोन्स में भी उतार-चढ़ाव बना रहता है. ऐसे में उनकी समस्याओं को समझ कर उनकी दिक्कतों को दूर करना ही सबसे अच्छा उपाय है. इसके लिए उनसे कुछ ऐसे काम करने को कहें जो आमतौर पर उन्हें पसंद हो.

गुस्से में हो बच्चा तो उसे डांटें नहीं

इसके अलावा ये भी तरीका ठीक है कि जब आपका बच्चा गुस्से में हो तो आप उसे डांटें नहीं बल्कि खुद शांत रहें और जब वह नॉर्मल हो जाए तो उससे प्यार से बात करें. साथ ही उन्हें अधिक से अधिक फिजिकल एक्टिविटी में बिजी रखें. जिसमें उनके पसंद के खेल जैसे क्रिकेट, फुटबॉल या जूडो-कराटे हो सकते हैं. अगर उन्हें घूमना पसंद है तो उनके साथ घूमने जाएं.

लें साइकोलॉजिस्ट की मदद

वहीं अगर तमाम कोशिशों के बाद भी अगर आपके बच्चे के बिहेवियर में कोई बदलाव नहीं आ रहा तो बिना संकोच के साइकोलॉजिस्ट से मदद लें. साइकोलॉजिस्ट बच्चे की परेशानी समझ कर उसका इलाज बताएंगे. साथ ही अपने घर का माहौल बदलकर भी आप अपने बच्चों को उनकी गुस्से वाली परेशानी से निजात दिला सकते हैं.

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First published: 4 November 2021, 12:56 IST
 
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