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Chandrayaan 2: फेल लैंडिंग के बाद भी चंद्रयान-2 ने उपलब्ध कराया महत्वपूर्ण डाटा, जलीय बर्फ और बाहर ज्वालामुखी के दिए सबूत

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 September 2021, 8:55 IST
(प्रतीकात्म फोटो)

Chandrayaan 2: चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो चुके चंद्रयान-2 ने वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण डाटा उपबल्ध कराया है. जिससे चंद्रमा पर जलीय बर्फ और ज्वालामुखी होने की सबूत मिले हैं. बता दें कि करीब दो साल पहले भारत के चंद्रयान-2 का चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग करते वक्त संपर्क टूट गया था. उसके बाद वैज्ञानिकों ने दोबारा से चंद्रयान 2 से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली. बावजूद इसके चंद्रयान ने ये महत्वपूर्ण डाटा उपलब्ध कराया है. जिसे नई खोज की श्रेणी में शामिल किया जा सकता है.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने ये दावा किया है. जिसमें चंद्रमा की सतह के अंदर जलीय बर्फ और बाहर ज्वालामुखी की मौजूदगी के सबूत भी शामिल हैं. इन दोनों खोज को बेहद अहम माना जा रहा है. इसरो का कहना है कि चंद्रयान-2 अंतरिक्षयान में लगे उपकरणों से हाल ही में जुड़े संपर्क से हासिल हुए डाटा ने इस अभियान को 98 फीसदी तक सफल साबित किया है. यही नहीं अंतरिक्षयान का ऑर्बिटर अब भी काम कर रहा है और अगले पांच साल तक लगातार धरती पर अहम डाटा भेजता रहेगा. यानी अभी चंद्रयान-2 के जरिये चंद्रमा की सतह के बारे में जानने के कई मौके मिलेंगे.


इसरो के चेयरमैन के. सिवन ने वैज्ञानिकों के उपयोग के लिए चंद्रयान-2 से हासिल हुए आंकड़े और विज्ञान दस्तावेजों को जारी किया है. चंद्रयान-2 के कक्ष पेलोड का डाटा भी जारी किया. ऑनलाइन आयोजित की गई एक कार्यशाला में अंतरिक्ष विभाग (डीओएस) में सचिव की भी भूमिका निभा रहे सिवन ने कहा, चंद्रयान-2 में लगे उपकरणों से आए डाटा से कई दिलचस्प वैज्ञानिक निष्कर्ष निकले हैं. इन्हें साइंस जर्नल में प्रकाशित कराया जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय बैठकों में भी पेश किया जा रहा है.

इसरो के मुताबिक, चंद्रयान-2 में लगे मास स्पेक्ट्रोमीटर चेस-2 ने पहली बार एक ध्रुवीय कक्षीय मंच से चंद्रमा के बाहरी वातावरण की आवेशहीन संरचना का अध्ययन किया है. इस दौरान चंद्रमा के मध्य और उच्च अक्षांशों पर एरगॉन-40 की परिवर्तनशीलता से जुड़ी अहम जानकारी मिली है. यही नहीं इसके आर्बिटर में लगे लार्ज एरिया सॉफ्ट एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (क्लास) उपकरण ने एक्स-रे स्पेक्ट्रम द्वारा भी चंद्रमा की सतह पर क्रोमियम और मैंगनीज जैसे मूल्यवान खनिजों होने के संकेत दिए हैं.

इसरो का कहना है कि चंद्रयान-2 ने अपने इमेजिंग इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर उपकरण (IIRM) की मदद से पहली बार चंद्रमा की जलयोजन विशेषताओं का पता लगाया है. इस उपकरण ने चंद्रमा की सतह पर हाइड्रोक्सिल (OH) के साथ ही पानी (H2O) की बर्फ की मौजूदगी के भी स्पष्ट संकेत दिए हैं. बता दें कि इससे पहले चंद्रयान-1 और नासा के क्लेमेंटाइन मिशन ने भी चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी के संकेत दिए थे, लेकिन वे पानी की प्रकृति को स्पष्ट नहीं कर पाए थे. डीएफएसएआर उपकरण ने ध्रुवीय क्षेत्रों में चंद्रमा की आकृति संबंधी विशेषताओं की सफल हाई रेजोल्यूशन मैपिंग की है. चंद्रयान-2 ने 100 किमी की दूरी से चंद्रमा की तस्वीरें ली हैं. इनमें चंद्र सतह पर पहाड़ों की आकृति और ज्वालामुखी के टीले स्पष्ट पहचाने गए हैं.

File Photo

बता दें कि सौर एक्स-रे मॉनिटर (XSM) उपकरण ने सूर्य से आने वाले रेडिएशन के माध्यम से चंद्रमा का अध्ययन करने के अलावा, सौर माइक्रोफ्लेयर्स के बारे में अहम जानकारी भी मिली है. एक्सएसएम ने पहली बार सक्त्रिस्य क्षेत्र के बाहर बड़ी संख्या में माइक्त्रसेफ्लेयर देखे हैं, और इसरो के अनुसार, इसका सौर कोरोना (सूर्य का बाहरी वायुमंडल) को गर्म करने के पीछे के तंत्र की समझ पर बहुत प्रभाव पड़ता है, जो कई दशकों से एक समस्या बनी रही है. बता दें कि चंद्रयान-2 में आठ उपकरण लगे हुए हैं. जो अलग-अलग तरीकों के जरिए लगातार चंद्रमा को लेकर अपने प्रयोग कर रहे हैं और डाटा भेज रहे हैं.

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इनमें लार्ज एरिया सॉफ्ट एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (क्लास), सोलर एक्स-रे मॉनिटर (एक्सएसएम), चंद्र एटमॉस्फेरिक कंपोजिशन एक्सप्लोरर-2 (चेस-2), ड्युल फ्रीक्वेंसी सिंथेटिक अपर्चर रडार (डीएफएसएआर), इमेजिंग इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर (आईआईआरएस), टेरेन मैपिंग कैमरा (टीएमसी), ऑर्बिटर हाई रेजोल्यूशन कैमरा (ओएचआरसी) और ड्युल फ्रीेक्वेंसी रेडियो साइंस (डीएफआरएस) शामिल हैं.

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First published: 11 September 2021, 8:55 IST
 
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