Home » इंडिया » Swamy's attack on Rajan a 'fascist' campaign to hound him out: Cong
 

कांग्रेस: स्वामी का राजन पर हमला एक फासीवादी अभियान

चारू कार्तिकेय | Updated on: 19 May 2016, 19:06 IST

भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन पर व्यक्तिगत हमले के मामले में कांग्रेस राजन के पक्ष में खड़ी हो गई है. कांग्रेस ने बीते बुधवार को राजन के पक्ष में मजबूती से उतरते हुए एनडीए सरकार पर निशाना साधा.

राजन को बाहर करने के लिए उन पर व्यक्तिगत हमले को एक 'फासीवादी' अभियान बताते हुए कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा. उन्होंने इस मामले में चुप्पी साधे रखने के लिए मोदी पर सवाल उठाया.

सुब्रमण्यम स्वामी: मानसिक रूप से रघुराम राजन पूरे भारतीय नहीं

स्वामी ने हाल ही में मोदी को पत्र लिखा था और आग्रह किया था कि राजन को बर्खास्त कर दिया जाए. उन्होंने आरोप लगाया था ‌कि राजन 'जानबूझकर' "भारतीय अर्थव्यवस्था का कचरा" करने की कोशिश कर रहे हैं. स्वामी यहीं नहीं रुके. उन्होंने यह भी बयान दिया कि राजन "मानसिक रूप से पूरी तरह से भारतीय नहीं हैं". एक के बाद एक ट्वीट करते हुए स्वामी ने इशारा किया था कि राजन को इसलिए भी खारिज कर दिया जाना चाहिए क्योंकि वो इस्लामी पद्धति की बैंकिंग प्रणाली के समर्थक हैं.

rajan4.jpg
rajan3.jpg
rajan2.jpg
rajan.jpg

मनीष तिवारी ने संवाददाताओं से कहा कि रिजर्व बैंक के गवर्नर पर इस तरह का हमला एक संस्था के रूप में रिजर्व बैंक पर सीधा हमला है. साथ ही तिवारी ने यह आरोप भी लगाया कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है.

उन्होंने कहा कि इस हमले के माध्यम से सत्तारूढ़ लोग यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि अगर रिजर्व बैंक ने उनकी हां में हां नहीं मिलाई तो वे उसके 'पीछे पड़ जाएंगे' और उसे इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर देंगे. तिवारी ने इसे "फासीवाद का सबसे विकृत रूप और फासीवादी आंदोलन में सबसे पुरानी चाल" की उपमा दे डाली.

भाई-भतीजावाद मार्का पूंजीवाद के खिलाफ भारतीय रिजर्व बैंक के रुख से चौकन्ने?

दिलचस्प बात यह है कि तिवारी ने यह आरोप लगाने की कोशिश भी की कि राजन पर यह हमला काले धन और क्रोनी कैपिटलिज्म से निपटने के लिए आरबीआई के प्रयासों का नतीजा है. उन्होंने याद दिलाया कि राजन के नेतृत्व में रिजर्व बैंक ने जोर दिया था कि जान-बूझकर दीवालिया होने वाले लोगों के नाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए.

पढ़ें: गवर्नर राजन से ज्यादा कमाते हैं आरबीआई के अधिकारी

साथ ही आरबीआई ने यह अभियान भी चलाया था कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अपनी गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों का ब्यौरा घोषित करें. तिवारी ने पूछा‌ ‌‌‌‌कि "क्या यह इस देश के कुछ बहुत-बहुत महत्वपूर्ण दागी पूंजीपतियों और सरकार में उनके संरक्षकों को चिंतित कर रहा है कि रिजर्व बैंक के गवर्नर को बाहर करने के लिए एक संस्थागत निर्णय ले लिया गया है?"

असली निशाना जेटली हैं?पूर्व केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर सरकार की चुप्पी साफ इशारा कर रही है कि या तो इसमें सरकार की "स्पष्ट मिलीभगत" है, या फिर रिजर्व बैंक के गवर्नर पर हुए हमले का असली निशाना वित्तमंत्री अरुण जेटली हो सकते हैं.

सुब्रमण्यम स्वामी: आरबीआई गवर्नर को शिकागो भेज देना चाहिए

दिलचस्प बात है कि ‌सिर्फ जेटली ही ऐसे केंद्रीय मंत्री हैं, जिन्होंने इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी की है, हालांकि उन्होंने राजनीतिक रूप से उचित लाइन ही ली. उन्होंने इससे पहले कहा था, "मुझे लगता है कि मुद्दे अधिक महत्वपूर्ण हैं न कि व्यक्ति." उन्होंने यह भी कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय के बीच रिश्ते बहुत परिपक्व स्तर पर हैं लिहाजा स्वामी द्वारा इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है.

First published: 19 May 2016, 21:43 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

अगली कहानी