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Kalyan Singh: जब कल्याण सिंह ने किया था मुलायम सिंह के साथ मंच साझा, बीजेपी को दी थी करारी शिकस्त

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 August 2021, 8:00 IST
Kalyan Singh and Mulayam Singh (File Photo)

बीजेपी के दिग्गज नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का 89 साल की उम्र में शनिवार शाम लखनऊ में निधन हो गया. कल्याण सिंह तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और एक बार बीजेपी को ही शिकस्त देकर संसद पहुंचे थे. साथ ही मोदी सरकार ने उन्हें राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल की भी जिम्मेदारी सौंपी थी. बेबाकी से हर सवाल का जवाब देने वाले कल्याण सिंह के नाम कई और रिकॉर्ड भी दर्ज हैं जिनके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा. कहते हैं कि राजनीति में कोई किसी का स्थाई मित्र और शत्रु नहीं होता. कुछ ऐसा ही कल्याण सिंह ने भी अपने राजनीतिक करियर को बचाने के लिए किया था.

जब उन्होंने अपने धुर विरोधी मुलायम सिंह के साथ मंच साझा किया और बीजेपी को करारी शिकस्त दी थी. बात साल 2009 के लोकसभा चुनाव की है. बीजेपी से अनबन के चलते कल्याण सिंह ने पार्टी छोड़ दी थी. चुनाव सिर पर थे. ऐसे में कल्याण सिंह को अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए समाजवादी पार्टी के तत्कालीन मुखिया मुलायम सिंह के साथ समझौता करना पड़ा. कल्याण सिंह ने 2009 के लोकसभा चुनाव के लिए मुलायम सिंह के साथ मंच साझा किया और एटा लोकसभा चुनाव से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतरे और बीजेपी को शिकस्त देने के बाद पहली बार लोकसभा भी पहुंचे.


कल्याण सिंह का एटा से गहरा रिश्ता था, प्रखर हिंदूवादी नेता के रूप में उनकी छवि से एटा के लोग पहले से ही प्रभावित थे. लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद उनका ये रिश्ता और मजबूत हो गया. उसके बाद कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह लगातार साल 2014 और साल 2019 में बीजेपी के टिकट पर यहां से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे. सपा के साथ मंच साझा करने के बाद कल्याण सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में एटा से चुनाव लड़ने आए. सपा ने उन्हें समर्थन दिया. मुलायम सिंह यादव ने उनके समर्थन में जनसभा को संबोधित किया था.

सपा के इस कदम से आहत होकर पूर्व सांसद कुंवर देवेंद्र सिंह ने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा. जो कल्याण सिंह के मुख्य प्रतिद्विंदी रहे. वहीं भाजपा से डॉ. श्याम सिंह शाक्य प्रत्याशी उस वक्त चुनावी मैदन में थे. भाजपा के ही सच्चे सिपाही माने जाने वाले डॉ. महादीपक सिंह शाक्य कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे थे.

कल्याण सिंह ने भले ही बीजेपी छोड़ दी थी, लेकिन इस लोधी बाहुल्य लोकसभा क्षेत्र एटा में उनका जादू सर चढ़कर बोला और मतदाताओं ने उन्हें जबरदस्त वोट देकर संसद में भेजा. इसके बाद उनका यहां आना जाना लगा रहा. सांसद चुने जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने एटा के शांति नगर में अपना आवास भी बनवाया. जिसमें उनके आगमन पर बैठकें हुआ करती थीं.

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बाद में परिस्थितियां बदलीं और कल्याण फिर से बीजेपी में शामिल हो गए. साल 2014 में कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें राजस्थान का राज्यपाल नियुक्त किया गया. कल्याण सिंह का एटा के पड़ोसी जिला कासगंज से भी बेहद करीबी रिश्ता रहा है. वह हमेशा कार्यकर्ताओं के बीच कहते थे कि कासगंज उनका अपना घर है. जिले के लोगों का उनसे काफी लगाव था. यहीं से उन्होंने साल 1993 में विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी.

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First published: 22 August 2021, 8:00 IST
 
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