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विदेश की यात्रा कर सकते हैं इन राशि के लोग, जानिए कभी आपकी भी तो नहीं खुलने वाली किस्मत

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 September 2021, 11:59 IST

विदेश यात्रा का अर्थ ज्योतिष में समुद्र पार की यात्रा माना जाता है. कोई भी लंबी यात्रा जिसमें कम से कम तीन पहर लगें, तो विदेश यात्रा ही समझी जाती है. कुंडली में पंचम, नवम और द्वादश भाव मूल रूप से विदेश यात्रा से ही संबंधित होते हैं. राहु व्यक्ति को सबसे ज्यादा विदेश जाने में सहायता करता है. इसके बाद शनि और मंगल भी सहायता करते हैं. शनि की साढ़ेसाती और ढैया भी विदेश यात्रा में सहायता करती हैं.

दरअसल शनि या राहु के मजबूत होने पर व्यक्ति घर से दूर जाकर स्थायी रूप से बस जाता है. सूर्य या चंद्रमा के कमजोर होने पर भी व्यक्ति विदेश में स्थाई रूप से बस जाता है. वृष, कन्या, मकर, मिथुन, तुला और कुम्भ वालों के विदेश में बस जाने की सम्भावना ज्यादा होती है.


जब कुंडली में चंद्रमा या शुक्र मजबूत होने लगे तो विदेश यात्रा में बाधाएं आती हैं. इसके अलावा कुंडली में शुभग्रहों की दशा, पासपोर्ट या वीजा में 01, 05 या 09 अंकी की प्रधानता भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकती है. इसे साथ ही यदि व्यक्ति की जन्म तिथि 04, 13, 22 या 31 हो तो व्यक्ति खूब विदेश जाता है या कभी नहीं जा पाता है. जब व्यक्ति की कुंडली जल तत्व प्रधान हो तब भी विदेश जाने में बाधा आती है.

विदेश जाने के लिए करें ये उपाय-

- शनि के तांत्रिक मंत्र का रोज सायंकाल जाप करें 
- मंत्र होगा- "ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः"

सावधान: आपके पार्टनर का है ऐसा अंगूठा तो रहें जरा संभलकर, किसी भी वक्त उसे आ सकता है गुस्सा
- नवम भाव के स्वामी ग्रह को मजबूत करें
हलके नीले रंग के वस्त्रों का खूब प्रयोग करें.
नदी पार करके कोई यात्रा जरूर कर लें.

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First published: 20 September 2021, 11:59 IST
 
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